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पुलिस पर युवक की पिटाई कर उसे लूट के मामले में फंसाने का आरोप


Narendrapur नरेन्द्रपुर:दक्षिणी उपनगर स्थित नरेंद्रपुर पुलिस स्टेशन गरिया निवासी एक युवक का कथित तौर पर अपहरण कर उसकी पिटाई करने और उसे डकैती के मामले में फंसाने के मामले में फिर से जांच के घेरे में है। हाईकोर्ट ने इस घटना पर पुलिस रिपोर्ट तलब की है। अगली सुनवाई में मामले की केस डायरी भी पेश की जाएगी। साथ ही, पुलिस को शिकायतकर्ता के शरीर पर चोटों के निशान और उसकी बिगड़ती शारीरिक स्थिति के बारे में बरुईपुर जेल द्वारा दी गई रिपोर्ट पर स्पष्टीकरण देना होगा।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने मंगलवार को कहा कि हालाँकि पुलिस ने अभी तक युवक की पिटाई या चोट के बारे में जानकारी नहीं दी है, लेकिन बरुईपुर जेल द्वारा अस्पताल को दी गई रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि युवक का जीवन संदिग्ध है। यह एक सरकारी दस्तावेज है। इसलिए, पुलिस को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना होगा। हाईकोर्ट 29 जुलाई को पुलिस रिपोर्ट के साथ मामले की फिर से सुनवाई करेगा कि युवक कैसे घायल हुआ।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की अदालत में वादी के वकील मयूख मुखर्जी ने आज बताया कि 13 जून की रात करीब 11:30 बजे नरेंद्रपुर थाने के सब-इंस्पेक्टर शांतनु व्यास और एक नागरिक स्वयंसेवक ने सौरभ मंडल नाम के एक युवक को गरिया पंचपोटा इलाके में शीतला मंदिर के पास वाले इलाके से उठाया था। उसी रात उसकी जमकर पिटाई की गई और अगले दिन तड़के थाने के सामने वाले गेट के बाहर छोड़ दिया गया। बाद में पुलिस ने उसे फिर से वहीं से उठाया और 20 मई के एक डकैती के मामले में उस पर आरोप तय किए। 14 जून को जब उसे बरुईपुर अदालत में पेश किया गया, तो न्यायाधीश ने उसे जेल भेज दिया। उस रात उसकी हालत बिगड़ने पर उसे सुबह बरुईपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
वकील ने आज अदालत में युवक के शरीर पर गंभीर चोटों के कई चित्र पेश किए। राज्य की ओर से पेश वकील स्वप्न बनर्जी ने कहा कि उन्हें अभी भी पुलिस से कोई निर्देश नहीं मिला है। इसके बाद अदालत ने राज्य से केस डायरी सहित पूरी घटना की जानकारी मांगी। अदालत का सवाल था कि पुलिस ने उसे 13 जून की रात को उठाया था, अगले दिन उसे अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे जेल भेज दिया। तो फिर जेल प्रशासन ने अस्पताल को यह तो बताया कि शरीर पर इतने सारे चोट के निशान कैसे आए, लेकिन पुलिस ने कुछ क्यों नहीं बताया?
राजपुर-सोनारपुर नगर पालिका के वार्ड नंबर 3, पंचपोटा के निवासियों का कहना है कि यह आश्चर्यजनक है कि पुलिस ने युवक को डकैती जैसे मामले में शामिल किया, जबकि उसे शराब पीने की रात को उठाया गया था। निवासियों का कहना है कि इससे पहले, नरेंद्रपुर थाने को एक व्यापारी को झूठे मामले में फँसाने और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किए बिना गलत जानकारी देने के आरोप में कई बार उच्च न्यायालय में चुनौती देनी पड़ी थी। हालाँकि सोनारपुर थाने से अलग होकर एक नया नरेंद्रपुर थाना बनाया गया है, लेकिन इस थाने को लेकर विवाद अभी तक जारी है। राज्य मंत्रिमंडल इस थाने को कोलकाता पुलिस के अधीन करने पर विचार कर चुका है।

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