फर्जी तबादला आदेश मामले में RMA करण देवांगन की जमानत याचिका खारिज

Baloda Bazar. बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में सामने आए फर्जी तबादला आदेश मामले में आरोपी ग्रामीण चिकित्सा सहायक (RMA) करण देवांगन को अदालत से राहत नहीं मिली है। सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट द्विजेंद्र नाथ ठाकुर की अदालत ने करण देवांगन की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करना और सरकारी कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है।

बचाव पक्ष की दलील हुई खारिज

आरोपी करण देवांगन की ओर से अधिवक्ता आनंदी शंकर मिश्रा ने अदालत में जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। बचाव पक्ष ने आरोपी को जमानत दिए जाने की मांग की, लेकिन अदालत ने मामले के तथ्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद आरोपी को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

तबादला बदलवाने के लिए पैसे देने का आरोप

जानकारी के अनुसार, रोहांसी अस्पताल में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण देवांगन पर आरोप है कि उसने अपनी पोस्टिंग बदलवाने के लिए भाजपा नेता कृष्णा अवस्थी को 1 लाख रुपये दिए थे। आरोप है कि इसके बाद कृष्णा अवस्थी ने अपने बेटे प्रणव अवस्थी और कंप्यूटर ऑपरेटर परख कश्यप के माध्यम से CMHO के फर्जी हस्ताक्षर वाला तबादला आदेश तैयार करवाया। यह फर्जी आदेश सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा होने के कारण मामला गंभीर माना जा रहा है।

खुलासे के बाद हुई गिरफ्तारी

मामले का खुलासा होने के बाद पलारी थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था। पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए सभी संबंधित आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल इस मामले में छह आरोपी बलौदाबाजार जेल में बंद हैं। इनमें भाजपा से निष्कासित जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी, पूर्व जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल, प्रणव अवस्थी, परख कश्यप, करण देवांगन और रवि सेन शामिल हैं।

कई अन्य मामलों में भी आरोपी

पुलिस के अनुसार, इस मामले के मुख्य आरोपी कृष्णा अवस्थी और प्रणव अवस्थी के खिलाफ अन्य थानों में भी मामले दर्ज हैं। दोनों के खिलाफ तीन अलग-अलग थानों में चार अन्य प्रकरण दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। पुलिस अब मामले में अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी तबादला आदेश तैयार करने में और कौन-कौन लोग शामिल थे और इस तरह के अन्य मामलों की संभावना तो नहीं है। अदालत ने सुनवाई के दौरान फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी व्यवस्था को प्रभावित करने वाले मामलों को गंभीर बताया। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की विश्वसनीयता और प्रशासनिक प्रक्रिया की सुरक्षा को महत्वपूर्ण माना जाता है। फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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