भारतीय सीमा पर चीन का फोकस जारी, अमेरिकी रिपोर्ट का दावा

Washington वाशिंगटनभारत के साथ बातचीत और तनाव कम करने की कोशिशों के बावजूद चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी सैन्य तैयारियों को कम नहीं किया है। अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) की एक ताजा रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि चीन भारत सीमा पर संभावित सैन्य टकराव को ध्यान में रखते हुए लगातार तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड भारत से जुड़े सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालती है। यह कमांड विशेष रूप से ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध और सीमा से जुड़ी परिस्थितियों के लिए संगठित और प्रशिक्षित की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2024 में चीनी सेना ने पहाड़ी क्षेत्रों में लाइव फायर ड्रिल और तेजी से सैन्य मूवमेंट से जुड़े अभ्यास किए। इन अभ्यासों का उद्देश्य कम ऑक्सीजन और ऊंचाई वाली परिस्थितियों में लड़ाई की तैयारी करना था। अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन अपने क्षेत्रीय दावों को ‘कोर इंटरेस्ट’ यानी मूल हित मानता है, जिन पर किसी भी तरह की बातचीत की गुंजाइश नहीं है। इस सूची में भारत का अरुणाचल प्रदेश भी शामिल बताया गया है, जिसे चीन अपने दावों के दायरे में रखता है।

हालांकि, भारत और चीन ने अक्टूबर 2024 में एलएसी पर बचे हुए गतिरोध वाले इलाकों से पीछे हटने (डिसएंगेजमेंट) पर सहमति जताई थी, लेकिन रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इससे चीन की लंबी अवधि की सैन्य रणनीति में कोई बदलाव नहीं दिखता। पेंटागन के अनुसार, तनाव में कमी का मतलब यह नहीं है कि चीन ने अपनी सैन्य तैयारी छोड़ दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कोशिश है कि सीमा पर तनाव कम रखकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग को रोका जाए। साथ ही, बीजिंग को भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी को लेकर चिंता बनी हुई है। चीन अमेरिका के इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते गठबंधनों को अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता के लिए चुनौती मानता है।

इसके अलावा, चीन की व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण प्रक्रिया भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) मिसाइल क्षमता, वायु शक्ति, साइबर यूनिट्स और अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणालियों का तेजी से विस्तार कर रही है। इससे चीन को एक साथ कई मोर्चों पर कार्रवाई करने की क्षमता मिल रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपनी पश्चिमी सीमा पर सैनिकों की तेज तैनाती और लंबे समय तक ऑपरेशन चलाने की क्षमता को भी मजबूत किया है। बेहतर लॉजिस्टिक्स, संयुक्त कमांड सिस्टम और त्वरित सैन्य जुटान पर खास ध्यान दिया जा रहा है।


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