मलेरिया पर सरकार के बड़े दावे, लेकिन मौतें नहीं थम रहीं! स्वास्थ्य मंत्री बोले- ‘एक भी मृत्यु न हो’, जमीनी हालात पर उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार भले ही मलेरिया नियंत्रण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन प्रदेश के कई जिलों से लगातार मलेरिया से मौत और नए मरीजों की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का यह बयान कि “मलेरिया से एक भी मृत्यु न हो, यही हमारा लक्ष्य है”, कई सवाल खड़े करता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34.29 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई और मलेरिया नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता मिली है। उन्होंने दावा किया कि बस्तर संभाग में मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.60 प्रतिशत से घटकर 0.48 प्रतिशत हो गई है।
हालांकि दूसरी ओर, हाल के दिनों में कांकेर, बस्तर और अन्य प्रभावित इलाकों से मलेरिया के मरीजों और मौतों की खबरें सामने आई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभियान इतने प्रभावी रहे हैं, तो फिर गंभीर मरीजों और मौतों की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं?
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 60 हजार से अधिक गंभीर मरीजों को रेफर किया गया और हजारों हाई-रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी की गई। लेकिन सवाल यह भी है कि दूरस्थ गांवों में समय पर जांच, दवा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता अभी भी कितनी सुनिश्चित है।
सरकार ने 375 नई 108 एम्बुलेंस, आधुनिक पैथोलॉजी सेवाएं और पैरामेडिकल शिक्षा के विस्तार का भी दावा किया है। इसके बावजूद कई ग्रामीण क्षेत्रों से एम्बुलेंस में देरी, स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी और इलाज में दिक्कतों की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री ने एनॉलॉग पनीर पर प्रभावी प्रतिबंध सुनिश्चित करने की भी बात कही। अब देखने वाली बात होगी कि यह कार्रवाई केवल निर्देशों तक सीमित रहती है या बाजार में इसकी वास्तविक निगरानी और सख्त कार्रवाई भी दिखाई देती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार के दावों और जमीनी चुनौतियों के बीच अंतर पर अब विपक्ष भी सवाल उठा सकता है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मलेरिया नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए गए दावे धरातल पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।
अब तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में जुलाई 2026 के दौरान मलेरिया से कम से कम 4 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें अधिकांश मामले कांकेर जिले से सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के दावों के बीच लगातार हो रही मौतों ने मलेरिया नियंत्रण की तैयारियों और जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
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