मारपीट मामले में FIR न दर्ज करने पर SI निलंबित, SP ने की कार्रवाई

Janjgir-Champa. जांजगीर-चांपा। मारपीट के एक मामले में विधि अनुसार कार्रवाई नहीं करने और थाने में दबाव बनाकर समझौता कराने के आरोप में एक उप निरीक्षक (SI) को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के निर्देश पर की गई है। जानकारी के अनुसार, घटना 27 मार्च 2026 की रात की है। ग्राम रोगदा निवासी प्रकाश नैरोसे मारपीट की शिकायत लेकर थाने पहुंचे थे। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद उप निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू ने शिकायत पर FIR दर्ज करने के बजाय दोनों पक्षों को थाने में ही बुलाकर समझौता कराने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता ने इस प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई और मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई।

प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि संबंधित अधिकारी द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। किसी भी आपराधिक मामले में शिकायत मिलने पर प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसके अलावा दोनों पक्षों पर समझौते का दबाव बनाने के आरोप को भी गंभीरता से लिया गया। इस लापरवाही को अनुशासनहीनता मानते हुए एसपी विजय कुमार पांडेय ने तत्काल प्रभाव से उप निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू को निलंबित करने का आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अधिकारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

इसके साथ ही मामले की प्रारंभिक जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। जांच अधिकारी को 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। पुलिस विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हलचल देखी जा रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा बनी हुई है। वहीं, आम लोगों के बीच भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार कार्रवाई करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग द्वारा समय-समय पर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए जाते हैं कि शिकायतों का निष्पक्ष और कानूनी तरीके से समाधान किया जाए। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से विभाग में अनुशासन बना रहता है और आम जनता का विश्वास भी कायम रहता है। फिलहाल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी। विभाग की नजर अब जांच के निष्कर्ष पर है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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