सौरव दास को गौरव भाटिया की चेतावनी माफी नहीं मांगी तो होगी FIR

नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता **सौरव दास** और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता **गौरव भाटिया** के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। विवाद एक ऐसी पोस्ट को लेकर शुरू हुआ, जिसमें गौरव भाटिया के नाम से स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर कथित बयान शेयर किया गया था। भाटिया ने इस पोस्ट को पूरी तरह फर्जी बताते हुए सौरव दास को इसे हटाने और 24 घंटे के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया। इसके कुछ समय बाद दास ने पोस्ट डिलीट कर दी, लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ।

मामला स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद से जुड़ा है। CJP ने हाल में भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन भी किया था। इस बीच सोशल मीडिया पर एक ग्राफिक सामने आया जिसमें कथित तौर पर गौरव भाटिया के हवाले से स्वतंत्र भारद्वाज को ‘दिमागी नक्सल’ बताते हुए भाजपा से उनका कोई संबंध नहीं होने की बात लिखी गई थी।

सौरव दास ने शेयर की थी पोस्ट

रिपोर्ट्स के मुताबिक सौरव दास ने अपने X अकाउंट से यह ग्राफिक शेयर किया। इसमें एक मीडिया संस्थान की ब्रांडिंग जैसी प्रस्तुति के साथ गौरव भाटिया की तस्वीर और उनके नाम से कथित बयान लिखा हुआ था।

दास ने इसे शेयर करते हुए अपनी प्रतिक्रिया भी दी। लेकिन पोस्ट गौरव भाटिया की नजर में आने के बाद विवाद शुरू हो गया।

भाटिया ने साफ कहा कि उनके नाम से चलाया जा रहा बयान फर्जी है और उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।

गौरव भाटिया ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम

गौरव भाटिया ने सौरव दास की पोस्ट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें 24 घंटे का समय दिया।

उन्होंने कहा कि पोस्ट फर्जी है और इसे हटाने के साथ बिना शर्त माफी मांगी जानी चाहिए। भाटिया ने ऐसा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच बहस तेज हो गई।

मामला केवल पोस्ट सही या गलत होने तक सीमित नहीं रहा बल्कि फेक न्यूज, AI से तैयार सामग्री और सोशल मीडिया पर राजनीतिक दावों की सत्यता को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।

83 मिनट में डिलीट हुई पोस्ट

भाटिया की चेतावनी के बाद सौरव दास ने विवादित पोस्ट डिलीट कर दी।

इसके बाद भाजपा प्रवक्ता ने एक और पोस्ट करते हुए दावा किया कि विवादित सामग्री हटाने में केवल **83 मिनट** लगे।

हालांकि भाटिया ने कहा कि पोस्ट डिलीट करना पर्याप्त नहीं है और बिना शर्त माफी अभी भी बाकी है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर माफी नहीं मांगी गई तो FIR की दिशा में कदम उठाया जाएगा।

सौरव दास ने बताया AI जनरेटेड

पोस्ट हटाने के बाद सौरव दास ने अपनी तरफ से भी सफाई दी। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि जिस सामग्री को उन्होंने शेयर किया था वह **AI-generated** थी।

हालांकि इसके साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं को स्वतंत्र भारद्वाज के बारे में अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी।

यानी पोस्ट हटाने के बावजूद दास ने मूल राजनीतिक मुद्दे को लेकर भाजपा पर सवाल उठाना जारी रखा। इसी वजह से विवाद समाप्त होने के बजाय दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई।

कौन हैं स्वतंत्र भारद्वाज?

इस विवाद के केंद्र में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज हैं।

हाल में CJP ने उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए दिल्ली में प्रदर्शन किया था। मामला जून में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी के पिता पर कथित हमले से जुड़ा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक CJP नेताओं ने भारद्वाज पर कार्रवाई की मांग को लेकर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन तक मार्च किया था। पुलिस मामले में पहले दर्ज FIR में बाद में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ चुकी है। भारद्वाज से जुड़े आरोप अभी कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं।

CJP और भाजपा के बीच बढ़ी तकरार

स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर CJP लगातार भाजपा से सवाल कर रही है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में कथित ‘दिमागी नक्सल’ बयान वाला ग्राफिक सामने आया।

सौरव दास के इसे शेयर करने के बाद भाजपा को सीधे प्रतिक्रिया देने का मौका मिल गया।

भाटिया ने राजनीतिक आरोपों का जवाब देने के बजाय सबसे पहले पोस्ट की प्रामाणिकता को चुनौती दी और उसे फर्जी बताया।

इसके बाद पूरा विवाद इस सवाल पर केंद्रित हो गया कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों को सोशल मीडिया पर किसी सामग्री को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की कितनी जिम्मेदारी है।

AI कंटेंट ने बढ़ाई नई चुनौती

सौरव दास द्वारा पोस्ट को AI-generated बताए जाने से मामला एक और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अब किसी नेता की तस्वीर के साथ बेहद वास्तविक दिखने वाले फर्जी बयान, ग्राफिक्स, ऑडियो और वीडियो तैयार किए जा सकते हैं।

ऐसी सामग्री अगर बिना स्पष्ट डिस्क्लेमर के शेयर की जाए तो आम यूजर उसे वास्तविक बयान समझ सकता है।

यही कारण है कि राजनीतिक व्यक्तियों के नाम से वायरल होने वाले किसी स्क्रीनशॉट या ग्राफिक को मूल वीडियो, आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट या विश्वसनीय रिपोर्ट से सत्यापित करना महत्वपूर्ण हो गया है।

पोस्ट डिलीट करने से खत्म नहीं हुआ विवाद

सौरव दास की तरफ से पोस्ट हटाए जाने के बाद भी गौरव भाटिया का रुख नरम नहीं हुआ।

उन्होंने बिना शर्त माफी की मांग जारी रखी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि क्या विवाद सोशल मीडिया की बहस तक सीमित रहता है या भाजपा प्रवक्ता की चेतावनी के मुताबिक कोई औपचारिक शिकायत या FIR की प्रक्रिया भी आगे बढ़ती है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट्स में भाटिया की ओर से 24 घंटे का अल्टीमेटम और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी सामने आई है।

कौन हैं सौरव दास?

सौरव दास CJP के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं और संगठन के प्रवक्ता के तौर पर लगातार मीडिया और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे हैं।

वह पत्रकारिता और RTI से जुड़े कामों के लिए भी जाने जाते हैं। CJP के गठन के बाद उन्हें संगठन के प्रमुख प्रवक्ताओं में जगह मिली और छात्र आंदोलनों से जुड़े कई मुद्दों पर वह संगठन का पक्ष रखते रहे हैं।

हाल के महीनों में CJP के प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के दौरान भी उनका नाम चर्चा में रहा है।

इसी कारण उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर की गई सामग्री पर तेजी से ध्यान गया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

विवाद सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

एक पक्ष ने फर्जी या AI-generated सामग्री शेयर करने को लेकर सौरव दास की आलोचना की, जबकि दूसरा पक्ष स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर भाजपा से सवाल पूछता दिखाई दिया।

हालांकि यहां दोनों मुद्दों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े आरोप और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग एक अलग मामला है, जबकि गौरव भाटिया के नाम से ऐसा बयान प्रकाशित करना जो उन्होंने नहीं दिया हो, उसकी सत्यता अलग सवाल है।

आगे क्या हो सकता है?

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गौरव भाटिया की कानूनी कार्रवाई की चेतावनी आगे बढ़ती है या नहीं।

उन्होंने पोस्ट हटाने के बाद भी सार्वजनिक माफी की मांग बरकरार रखी है।

दूसरी तरफ सौरव दास पोस्ट डिलीट कर चुके हैं और उसे AI-generated बताते हुए मूल राजनीतिक मुद्दे पर भाजपा को चुनौती दे रहे हैं।

इस पूरे विवाद ने राजनीतिक सोशल मीडिया की एक बड़ी समस्या को फिर सामने ला दिया है। AI के दौर में तस्वीर और किसी नेता के नाम के साथ लिखा हुआ बयान अपने आप प्रामाणिक नहीं माना जा सकता।

राजनीतिक कार्यकर्ताओं, नेताओं और बड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिए किसी वायरल दावे को शेयर करने से पहले उसकी पुष्टि करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। एक गलत पोस्ट कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकती है और बाद में उसे डिलीट करने के बावजूद उसका स्क्रीनशॉट लंबे समय तक सोशल मीडिया पर घूमता रह सकता है।

फिलहाल इस मामले में इतना स्पष्ट है कि सौरव दास ने विवादित पोस्ट हटा दी है, गौरव भाटिया ने उसे फर्जी बताया है और बिना शर्त माफी की मांग करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अब यह देखना होगा कि दोनों के बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुई यह लड़ाई यहीं खत्म होती है या मामला कानूनी मोड़ लेता है।


Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button