सब कुछ बह गया, समधी के एक भरोसे ने संभाला टूटता पिता
बताया जा रहा है कि चंपारण तटबंध करीब 200 फीट तक टूट गया था, जिससे आधा दर्जन से अधिक परिवार प्रभावित हुए। घर बहने के बाद बिंदेश्वरी अपने परिवार के साथ तटबंध पर प्लास्टिक की पन्नी के नीचे रहने को मजबूर हैं। मुश्किल समय में बेटी के होने वाले ससुर ने परिवार को बड़ा सहारा दिया। उन्होंने बिंदेश्वरी से कहा कि आपदा किसी के नियंत्रण में नहीं होती और अभी शादी को लेकर दबाव लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिया कि पहले हालात सामान्य होने दिए जाएं, उसके बाद दोनों परिवार बैठकर शादी की नई तारीख तय करेंगे।
इस भरोसे से बिंदेश्वरी को बड़ी राहत मिली। जिस पिता को बेटी की शादी की चिंता लगातार परेशान कर रही थी, उसे कम से कम यह भरोसा मिला कि रिश्ते की ओर से कोई दबाव नहीं है। इस बीच सांसद पप्पू यादव भी फुलियाखांड़ पहुंचे और बाढ़ प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने बिंदेश्वरी दास को 10 हजार रुपये की तत्काल सहायता दी और मकान के पुनर्निर्माण में सहयोग का आश्वासन दिया। बिहार प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष अमित गिरी ने भी रागिनी की शादी का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। बाढ़ की इस त्रासदी ने परिवार का घर और जमा-पूंजी छीन ली, लेकिन मुश्किल घड़ी में रिश्तेदारों और मदद के लिए आगे आए लोगों ने परिवार को नया हौसला दिया है।
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