दबंगों ने दलित युवक से जूते चटवाए, पीट-पीटकर हाथ तोड़ा

यह घटना पिछले कुछ महीनों से चल रही रंजिश से जुड़ी है। सुमेरपुर के प्राथमिक स्कूल में ढाई महीने पहले बाबा साहब आंबेडकर की फोटो फाड़े जाने के बाद गांव में तनाव पैदा हुआ था। इस घटना के विरोध में कई लोग बच्चों के साथ सड़क पर प्रदर्शन कर चुके थे। उसी रंजिश का असर उमेश बाबू वर्मा पर इस अमानवीय व्यवहार के रूप में देखने को मिला। पीड़ित युवक ने कई बार थाने में शिकायत की, लेकिन स्थानीय पुलिस ने तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक डॉ. दीक्षा शर्मा से संपर्क किया और पूरी घटना बताई। एसपी ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके आदेश पर एक नामजद और दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है। इस बीच पीड़ित और उसके परिवार में डर और सहमना देखा जा रहा है। ग्रामीणों और मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है और अधिकारियों से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने हमीरपुर में पुरानी रंजिश और जातिसूचक हिंसा के गंभीर पहलुओं को उजागर किया है। पुलिस प्रशासन ने बताया कि वह पीड़ित की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मामले की निष्पक्ष जांच करने के लिए तत्पर है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की हिंसा से समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा होता है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से अपील की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। इस प्रकार, हमीरपुर में दिवाली से पहले सामने आए इस गुंडई मामले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि पुरानी रंजिश और जातिगत भेदभाव समाज में हिंसा का कारण बन सकते हैं। पुलिस की कार्रवाई और जांच के बाद ही दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाया जा सकेगा।
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