धान खरीदी केंद्रों में करोड़ों का गबन

पिंटू दुबे,​बिलासपुर। Chhattisgarh : जिले के चार प्रमुख संग्रहण केंद्रों—करगीकला, मोपका, भरनीभाठा और बिल्हा—में 4500 मीट्रिक टन धान की भारी किल्लत (शार्टेज) का मामला सामने आने के डेढ़ महीने बाद भी शासन और प्रशासन की सुस्ती बरकरार है। भौतिक सत्यापन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जहाँ रिकॉर्ड में 5500 मीट्रिक टन धान होना चाहिए था, वहाँ वास्तव में केवल 1000 मीट्रिक टन ही शेष बचा था, जिसमें से भी अब मात्र 500 मीट्रिक टन धान उठाव के लिए बचा है।

इस गंभीर वित्तीय अनियमितता के बावजूद, जिला विपणन अधिकारी (DMO) द्वारा संबंधित प्रभारियों को केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली गई है और दोषी प्रभारियों को उनके पदों से हटाने के बजाय यथावत बनाए रखा गया है।

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विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह के बड़े शार्टेज मामले सामने आने के कारण शासन एक समान नीति के तहत कार्रवाई करने की प्रतीक्षा कर रहा है, जिससे फिलहाल भ्रष्ट अधिकारियों को राहत मिली हुई है। वहीं दूसरी ओर, इस वर्ष सरकार ने धान को सीधे केंद्रों से मिलों में भेजकर परिवहन और रख-रखाव का खर्च बचाने की कोशिश की है, लेकिन पुराने घाटे और गायब हुए धान की भरपाई पर अब भी संशय बरकरार है।


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