Earthquake In Meghalaya: मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके, 2.8 मापी गई तीव्रता

Earthquake In Meghalaya: मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स में महसूस किए गए भूकंप के हल्के झटके, 2.8 मापी गई तीव्रता

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

 Earthquake In Meghalaya: मेघालय के वेस्ट खासी हिल्स जिले में रविवार सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए. रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप सुबह करीब 6:50 बजे आया. राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान या संपत्ति की क्षति की कोई खबर नहीं है.

सुबह 6:50 बजे दर्ज हुआ कंपन

नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भूकंप का केंद्र वेस्ट खासी हिल्स में जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था. कम गहराई पर होने के कारण इसके हल्के झटके सतह पर महसूस किए गए. स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कुछ इलाकों में लोगों ने हल्के झटके महसूस होने की बात कही है.  यह भी पढ़े: Philippines Earthquake: फिलीपींस के समर द्वीप पर 6.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप; इमारतों से बाहर निकले लोग (See Pics)

सीस्मिक जोन 5 में आता है मेघालय

भौगोलिक दृष्टि से मेघालय और पूरा उत्तर-पूर्वी भारत भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है. जटिल भूगर्भीय संरचना और एक्टिव टेक्टोनिक प्लेट्स की सीमाओं के करीब होने के कारण इस क्षेत्र में लगातार भूकंप आते रहते हैं. मेघालय का पूरा राज्य ‘सीस्मिक जोन V’ (Seismic Zone 5) के अंतर्गत आता है, जिसे भारत में भूकंप की दृष्टि से सबसे खतरनाक और उच्चतम जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है.

क्षेत्र में लगातार जारी है भूगर्भीय हलचल

उत्तर-पूर्वी भारत में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार कम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जा रहे हैं. मेघालय की बात करें तो इसी महीने 14 मई को वेस्ट खासी हिल्स में 2.7 तीव्रता का भूकंप आया था. वहीं, इससे पहले मार्च के महीने में वेस्ट खासी हिल्स में 3.4 तीव्रता और साउथ वेस्ट खासी हिल्स में 2.9 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे. मेघालय के अलावा नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में भी हाल के दिनों में भूकंप दर्ज किए गए हैं.

इतिहास और आपदा प्रबंधन की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र की टेक्टोनिक गतिविधि को देखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारी और भूकंप-रोधी बुनियादी ढांचे (Earthquake-Resistant Infrastructure) का होना बेहद जरूरी है. इतिहास पर नजर डालें तो उत्तर-पूर्वी भारत ने देश के सबसे विनाशकारी भूकंपों का सामना किया है, जिनमें 1897 का शिलांग पठार का भूकंप और 1950 का असम का महाभूकंप शामिल हैं. इन ऐतिहासिक भूकंपों ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी.




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