मानसून में सर्पदंश का कहर, करैत सांप के डंसने से

सरगुजा (छत्तीसगढ़): CG NEWS : मानसून की पहली बारिश के साथ ही मौत का साया छा गया है। जहां लोग राहत की सांस ले रहे थे, वहीं रात की अंधेरी चादर में छिपे जहरीले करैत सांप ने परिवारों को तबाह कर दिया। शुक्रवार को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तीन और जिंदगियां सर्पदंश की भेंट चढ़ गईं – इनमें बलरामपुर जिले के दो सगे भाई और जशपुर जिले की एक महिला शामिल हैं।

दोनों मासूम भाइयों की दर्दनाक कहानी:

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बलरामपुर जिले के पिपरसोत गांव में गुरुवार रात करीब 11:30 बजे 9 वर्षीय विकास नगेशिया और उसके 3 वर्षीय छोटे भाई विक्रांत नगेशिया खाट पर निश्छल नींद सो रहे थे। अचानक विकास को शरीर में काटने जैसा एहसास हुआ। शोर मचने पर परिवार वाले दौड़े तो खाट के पास एक भयानक करैत सांप दिखाई दिया। दोनों बच्चों को तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर बेहतर इलाज के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। लेकिन जहरीले सांप के काटने का असर इतना घातक था कि डॉक्टर भी उन्हें बचा नहीं सके। दोनों भाई अस्पताल में दम तोड़ गए।

जशपुर की महिला की कहानी:

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जशपुर जिले के डोकड़ा गांव की 43 वर्षीय सेबेपितया 30 जून की रात जमीन पर सो रही थीं। करैत सांप ने उन्हें डस लिया। परिवार ने कमरे में सांप देखा और तुरंत अस्पताल पहुंचाया। हालत बिगड़ने पर उन्हें भी अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

3 दिनों में 6 मौतों का सिलसिला:

मानसून शुरू होते ही सरगुजा संभाग में सर्पदंश के मामले तेजी से बढ़ गए हैं। सिर्फ पिछले तीन दिनों में 6 लोगों की मौत हो चुकी है। ग्रामीण इलाकों में दहशत का माहौल है। लोग रात में सोने से भी डर रहे हैं।

करैत सांप – रात का खूंखार शिकारी:

करैत भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। यह रात में सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है, खासकर घरों, खाट के नीचे या जमीन पर सो रहे लोगों को निशाना बनाता है। काटने पर शुरू में दर्द कम लगता है, लेकिन धीरे-धीरे शरीर सुन्न पड़ने लगता है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक, झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद करने की बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना ही एकमात्र बचाव है।
यह घटनाएं एक बार फिर याद दिलाती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की रोकथाम, जागरूकता और एंटी-वेनम की उपलब्धता कितनी जरूरी है। प्रशासन को भी मानसून सीजन में विशेष अभियान चलाने की जरूरत है।

आपकी राय: ऐसे मामलों में क्या सरकार को फ्री एंटी-स्नेक वेनम किट गांव-गांव में उपलब्ध करानी चाहिए? कमेंट में जरूर बताएं।

 

 

 

 

 


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