सूपेबेड़ा में मरते लोग और सियासत में मशगूल सरकार

देवभोग। गरियाबंद देवभोग के सूपेबेड़ा में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन पहले 71वीं मौत हो गई। ग्राम के पूर्व संरपंच ने किडनी की बीमारी से दम तोड़ दिया। इधर शासन प्रशासन में सूपेबेड़ा को लेकर सियासत तेज है। एक तरफ जहां राज्यपाल अनुसूइया उइके ने सूपेबेड़ा में स्थिति भयावह बताते हुए 22 अक्टूबर को दौरा करने और सरकार द्वारा हैलीकाप्टर नहीं दिए जाने को लेकर बड़ा बयान दिया है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यपाल के इस बयान पर हैरानी जताते हुए शासन द्वारा सूपेबेड़ा में समुचित इंतजाम किए जाने की बात कही है।

सूपेबेड़ा में पिछले 6 सालों में 71 मौतें हो चुकी है तथा 100 से अधिक लोग अभी भी किडनी की बीमारी से पीड़ित है। पिछली सरकार पर दोष मढ़ते हुए कांग्रेस सरकार बनते ही स्वास्थ्य मंत्री ने सूपेबेड़ा का दौरा किया और कई तरह के वादे किए। लेकिन 9 महीने बात भी सूपेबेड़ा में हालात सुधरते नहीं दिखाई दे रहे हैं। हालिया हुई मौत ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि हालात सुधरे नहीं है। वहीं दूसरी तरफ राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच सूपेबेड़ा को लेकर बयानबाजी से अब इस मामले ने सियासती रूप ले लिया है।

राज्यपाल के 22 अक्टूबर के दौरे को देखते हुए इधर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग एलर्ट मोड पर आ गया है। आज सुबह से एम्स और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सूपेबेड़ा में डेरा डाला हुआ है। लगभग दो दर्जन डाक्टरों और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आधा दर्जन स्थानों पर कैंप डाला है। सभी ग्रामीणों की जांच की जा रही है साथ ही दवाइयां बांटी जा रही है। बहरहाल राज्यपाल के दौरे से सूपेबेड़ा के ग्रामीणों की सुध तो विभाग ने ली।

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