Ashadhi Yatra 2025: आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर के विट्ठल रुक्मिणी मंदिर में किसी को भी VIP दर्शन नहीं मिलेंगे, पालकमंत्री जयकुमार गोरे के निर्देश

Ashadhi Yatra 2025: आषाढ़ी एकादशी पर पंढरपुर के विट्ठल रुक्मिणी मंदिर में किसी को भी VIP दर्शन नहीं मिलेंगे, पालकमंत्री जयकुमार गोरे के निर्देश

(Photo Credits: X)

Ashadhi Yatra 2025: आषाढ़ी एकादशी अगले महीने शुरू होनेवाली है. देशभर से लाखों श्रद्धालु पंढरपुर के विट्ठल रुक्मिणी के दर्शन के लिए पहुंचते है. ऐसे में अब पालकमंत्री ने एक बड़ा फैसला लिया है. पंढरपुर स्थित विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में इस वर्ष आषाढ़ी एकादशी यात्रा के दौरान VIP दर्शन की सुविधा पूरी तरह से बंद कर दी गई है. यह निर्णय स्वयं पालक मंत्री जयकुमार गोरे के नेतृत्व में लिया गया है. उन्होंने इसकी शुरुआत खुद से करते हुए, VIP सुविधा लेने से इनकार किया और आम श्रद्धालुओं की तरह पैदल चलकर मंदिर में दर्शन किए.6 जुलाई को होने वाली आषाढ़ी एकादशी के लिए वारकरी समाज की तैयारियां जोरों पर हैं.संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर की पालखियां अगले सप्ताह प्रस्थान करेंगी.इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने मंदिर परिसर को नो व्हेइकल ज़ोन घोषित कर दिया है.

मंत्री गोरे ने कहा कि ‘विधायक और सांसदों के काफिले मंदिर तक आते हैं जिससे आम श्रद्धालुओं को असुविधा होती है, इसलिए अब मुख्यमंत्री को छोड़ किसी को भी वाहन से मंदिर तक आने की अनुमति नहीं होगी.ये भी पढ़े:Ashadhi Ekadashi 2024: सीएम एकनाथ शिंदे ने आषाढ़ी एकादशी पर श्री विट्ठल रुक्मिणी मंदिर में की पूजा-अर्चना, पंढरपुर वारी यात्रा में हुए शामिल (Watch Videos)

श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार

मंदिर परिसर और चंद्रभागा नदी के तट की मंत्री जयकुमार गोरे ने समीक्षा की.उन्होंने जानकारी दी कि इस बार 7.5 लाख स्क्वेअर फीट का वॉटरप्रूफ मंडप विभिन्न स्थानों पर लगाया जाएगा, ताकि बारिश या धूप में वारकरियों को परेशानी न हो.

एआई आधारित ड्रोन से भीड़ पर निगरानी

वारकरी भक्तों की संख्या को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ पर नियंत्रण के लिए AI आधारित ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग करने का निर्णय लिया है. इससे सुरक्षा और व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा.

15 लाख से अधिक भक्तों को मिलेगा स्वास्थ्य लाभ

पैदल वारी में शामिल होने वाले भक्तों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्स और अन्य मेडिकल स्टाफ की तैनाती की जाएगी. इस यात्रा के दौरान करीब 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं को प्राथमिक और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी.

 




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