Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में भाकपा-माले ने जारी की उम्मीदवारों की सूची, दो चरणों में 20 सीटों पर उतारे उम्मीदवार

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में भाकपा-माले ने जारी की उम्मीदवारों की सूची, दो चरणों में 20 सीटों पर उतारे उम्मीदवार

पटना, 18 अक्टूबर : बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के लिए महागठबंधन के घटक दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. पार्टी ने आगामी चुनाव के दोनों चरणों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा एक साथ की है. कुल 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे गए हैं, जिनमें अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग दोनों को प्रतिनिधित्व दिया गया है. पहले चरण के तहत भाकपा-माले ने 14 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं. इनमें भोरे, जीरादेई, दरौली, दरौंडा, कल्याणपुर, वारिसनगर, राजगीर, दीघा और फुलवारी जैसी प्रमुख सीटें शामिल हैं.

घोषित उम्मीदवारों में भोरे विधानसभा सीट से धनंजय, जीरादेई से अमरजीत कुशवाहा, दरौली से सत्यदेव राम, दरौंडा से अमरनाथ यादव, कल्याणपुर से रंजीत कुमार राम, वारिसनगर से फूलबाबू सिंह, राजगीर से विश्वनाथ चौधरी, दीघा से दिव्या गौतम, फुलवारी से गोपाल रविदास, पालीगंज से संदीप सौरभ, आरा से क्यामुदीन अंसारी, अगिआंव से शिव प्रकाश रंजन, तरारी से मदन सिंह और डुमरांव से अजीत कुमार सिंह शामिल हैं. यह भी पढ़ें : Chhattisgarh: गरियाबंद में पुलिस-सीआरपीएफ की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों का डंप सामग्री बरामद

पहली सूची में घोषित उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. हालांकि, भोरे सीट से भाकपा-माले टिकट पर जितेंद्र पासवान ने भी नामांकन किया है, लेकिन पार्टी ने धनंजय को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है. बता दें कि पहले चरण के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 17 अक्टूबर थी.

भाकपा-माले ने फेज-2 में पार्टी ने कुल 6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं. सिकटा विधानसभा सीट से वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि पिपरा (सुपौल) से अनिल कुमार, बलरामपुर से महबूब आलम, करकट से अरुण सिंह, अरवल से महानंद सिंह और घोसी में राम बली सिंह यादव को टिकट दिया गया है. गौरतलब है कि भाकपा-माले बिहार में महागठबंधन में शामिल कांग्रेस-राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. हालांकि, इन दलों में अभी तक सीट बंटवारे के लिए आखिरी फैसला नहीं हुआ है. यही कारण है कि पहले चरण की कई सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के उम्मीदवारों की दोस्ताना लड़ाई है.




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