BRICS समिट पर दीपेंद्र हुड्डा का बयान

BHIWANI भिवानी। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने BRICS समिट 2026 को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पूरे देश का सम्मेलन है और इसमें भारत की प्रतिष्ठा सर्वोपरि रहनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार को सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं देते हुए चीन और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। हुड्डा ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

भिवानी में मीडिया से बातचीत के दौरान दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “यह देश का सम्मेलन है। हमारी देश की सरकार को शुभकामनाएं हैं कि इस सम्मेलन में देश की प्रतिष्ठा रहे।” इसके साथ ही उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए पाकिस्तान और चीन को लेकर सरकार के सामने कुछ सवाल रखे।

कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान चीनी तकनीक और चीन की सैन्य मदद के साथ मैदान में उतरा था। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल किया कि क्या इन बातों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। हुड्डा ने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बातचीत के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों से जुड़े विषयों पर भी स्पष्टता जरूरी है।

दीपेंद्र हुड्डा के बयान में एक तरफ BRICS सम्मेलन की सफलता और भारत की प्रतिष्ठा को लेकर सरकार के लिए शुभकामना दिखाई दी, तो दूसरी तरफ चीन से जुड़े मुद्दों पर सवाल भी उठाए गए। उन्होंने सम्मेलन को किसी एक राजनीतिक दल या सरकार तक सीमित न मानते हुए इसे देश से जुड़ा आयोजन बताया।

BRICS समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर सदस्य देश आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन व्यवस्था, व्यापार, विकास और आपसी सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हैं। ऐसे में भारत में आयोजित सम्मेलन को लेकर सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।

कांग्रेस सांसद की टिप्पणी का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के दौरान भारत के हित और प्रतिष्ठा प्राथमिकता में होने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान और चीन से जुड़े सुरक्षा संबंधी विषयों को भी चर्चा में बनाए रखने की बात कही। हुड्डा के बयान से BRICS समिट के बीच चीन को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है। विपक्ष पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा और चीन के साथ भारत के संबंधों को लेकर केंद्र सरकार से सवाल करता रहा है।

फिलहाल दीपेंद्र हुड्डा ने BRICS समिट के सफल आयोजन के लिए सरकार को शुभकामनाएं दी हैं, लेकिन साथ ही सवाल किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को कथित तौर पर मिली चीनी तकनीक और मदद जैसे मुद्दों को क्या नजरअंदाज किया जा सकता है।


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