CGNews: PMGSY में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा, सीमेंट सरिए से नहीं मिट्टी से बना डाली 10 km नाली, अंचल में ऐसे हो रहा विकास

पीएम ग्रामीण सड़क योजना यानी PMGSY के तहत ग्रामीण इलाकों में बेहतर सड़क और नाली निर्माण का कार्य किया जाना है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड के ग्राम चटनियां से सबाग मार्ग तक बनाई जा रही नाली में जो सच्चाई सामने आई है, वह हैरान करने वाली है। सड़क के किनारे पानी के कटाव से बचाने के लिए सीमेंट-गिट्टी से मजबूत नाली बनाई जाती है, लेकिन यहां तो नाली में सीमेंट-गिट्टी गायब है और केवल मिट्टी का उपयोग किया गया है। इस निर्माण कार्य में खुल्लम-खुल्ला भ्रष्टाचार और लापरवाही नजर आ रही है

बता दें कि बलरामपुर जिले के चटनियां से सबाग जाने वाले मार्ग पर जहां (PMGSY) के तहत नई सड़क के किनारे नाली निर्माण का कार्य किया जा रहा है। इस नाली का उद्देश्य था कि बारिश का पानी जंगल से होते हुए सुरक्षित रूप से नदी तक पहुंचे, जिससे सड़क को नुकसान न हो। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां बनाई जा रही नाली में सीमेंट, गिट्टी और रेत की जगह सिर्फ मिट्टी का भराव कर दिया गया है। ऊपर से महज़ एक पतला-सा सीमेंट का लेप चढ़ाकर इसे पक्के निर्माण जैसा दिखाने की कोशिश की गई है। आप इन तस्वीरों में साफ देख सकते हैं कि नाली की दीवारों से मिट्टी झड़ रही है। कई जगहों पर तो निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही नाली टूटने लगी है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बताया कि निर्माण में मिट्टी का इस्तेमाल हो रहा है और गुणवत्ता बेहद खराब है।

एक ग्रामीण ने कहा साहब यहां सीमेंट के नाम पर सिर्फ मिट्टी से काम चलाया जा रहा है। ये नाली टिकेगी ही नहीं। अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती।”

सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि जब PMGSY विभाग के अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण के लिए आते हैं, तो फिर इतनी बड़ी लापरवाही उनकी नजरों से कैसे बची रह जाती है? क्या यह किसी बड़ी मिलीभगत का हिस्सा है? लगभग 10 किलोमीटर की इस नाली में कई जगह पहले से ही दरारें और टूट-फूट नजर आ रही हैं। ऐसे में भविष्य में इसकी हालत क्या होगी, ये आसानी से समझा जा सकता है।

सरकारी योजनाओं का असली लाभ तब ही जनता तक पहुंचता है जब सिस्टम पारदर्शी और जिम्मेदार हो। लेकिन जब रोज़ाना निरीक्षण के बावजूद इस तरह की गड़बड़ियां सामने आती हैं, तो यह सवाल सीधे व्यवस्था पर उठता है। इस पूरे मामले में EE,SDO ,इंजीनियरिंग सहित विभाग के अधिकारियों की लापरवाही साफ नज़र आ रही है।

बहरहाल अब देखना होगा कि PMGSY विभाग और जिला प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। लेकिन सवाल यह उठता है की खुद कलेक्टर और जिले के आला अधिकारी इस निर्माण का निरीक्षण करने कई बार पहुंच चुके हैं लाख समझाइए देने के बावजूद भी PMGSY विभाग के जिला अधिकारी को कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है क्योंकि यह ऊंची पहुंच रखने वाले अधिकारी हैं जिले के दो प्रमुख विभागों RES और PMGSY में पदस्थ हैं।


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