CM भजनलाल शर्मा ने पत्नी गीता शर्मा संग मनाया करवा चौथ, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने करवा चौथ के पावन अवसर पर अपनी धर्मपत्नी गीता शर्मा के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करने की जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों, विशेषकर माताओं और बहनों के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य बने रहने की कामना की। करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी पारिवारिक और धार्मिक परंपराओं के प्रति अपने जुड़ाव के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, 29 अक्टूबर 2026 के इस आयोजन का स्वतंत्र समकालीन विवरण उपलब्ध नहीं हो सका है।

गुरुवार को देशभर में करवा चौथ का त्योहार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विवाहित महिलाओं ने अपने पतियों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखा। राजस्थान में भी इस पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर पूजा-अर्चना की।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी पत्नी गीता शर्मा इससे पहले भी करवा चौथ का त्योहार एक साथ मनाते रहे हैं। वर्ष 2025 में दोनों ने विधि-विधान से करवा चौथ की पूजा की थी। उस दौरान गीता शर्मा ने चंद्रमा के दर्शन के बाद अपना व्रत खोला था और मुख्यमंत्री ने उन्हें जल पिलाकर व्रत पूर्ण कराया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दी थीं।

मुख्यमंत्री ने अपने पिछले वर्ष के संदेश में करवा चौथ जैसे पवित्र त्योहारों को भारतीय संस्कृति की ऐसी परंपरा बताया था, जो प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना से जुड़ी हुई है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की थी कि यह पर्व सभी माताओं और बहनों के जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लेकर आए। उनका यह संदेश पारिवारिक संबंधों और धार्मिक परंपराओं के महत्व को रेखांकित करता है।

भजनलाल शर्मा सार्वजनिक जीवन में व्यस्त रहने के बावजूद विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेते रहे हैं। वह कई अवसरों पर अपनी धर्मपत्नी गीता शर्मा के साथ मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना करते नजर आए हैं। इसी वर्ष मई में अपनी वैवाहिक वर्षगांठ के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्नी के साथ जयपुर के प्रसिद्ध गोविंद देवजी मंदिर और मोती डूंगरी गणेश मंदिर में दर्शन किए थे।

उस अवसर पर मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने भगवान के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की थी। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी उन्हें वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाएं दी थीं। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया था।

करवा चौथ का पर्व राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रमा निकलने तक निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत के माध्यम से महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

करवा चौथ की पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की आराधना की जाती है। शाम के समय महिलाएं पूजा की थाली सजाकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेती हैं। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनने की परंपरा निभाई जाती है।

चंद्रमा दिखाई देने के बाद महिलाएं उसे जल अर्पित कर अर्घ्य देती हैं। कई परिवारों में छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा है। इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। हालांकि, अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पूजा की विधि तथा परंपराओं में अंतर हो सकता है।

वर्ष 2026 में करवा चौथ का त्योहार गुरुवार, 29 अक्टूबर को मनाया गया। पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक बताया गया। वहीं, अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय का समय स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग निर्धारित था।

राजस्थान में करवा चौथ को लेकर महिलाओं के बीच विशेष उत्साह रहता है। त्योहार से पहले बाजारों में पूजा सामग्री, करवे, छलनी, मेहंदी, चूड़ियां, साड़ियां और अन्य श्रृंगार सामग्री की खरीदारी की जाती है। महिलाओं के लिए यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक खुशियां साझा करने का अवसर भी होता है।

नई विवाहित महिलाओं के लिए पहला करवा चौथ विशेष महत्व रखता है। कई परिवारों में इस अवसर पर पारंपरिक उपहार दिए जाते हैं और सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है। परिवार की बड़ी महिलाएं नई बहुओं को पूजा की विधि और उससे जुड़ी परंपराओं के बारे में जानकारी देती हैं।

करवा चौथ का धार्मिक महत्व होने के साथ इसका सामाजिक और सांस्कृतिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। यह त्योहार पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास की भावना को व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। बदलते समय के साथ कई पति भी अपनी पत्नियों के साथ व्रत रखने लगे हैं। इससे यह पर्व पारस्परिक सम्मान और सहयोग की भावना से भी जुड़ता जा रहा है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने सार्वजनिक जीवन में कई बार भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक त्योहारों के महत्व का उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री और उनकी धर्मपत्नी की धार्मिक आयोजनों में संयुक्त भागीदारी भी विभिन्न अवसरों पर सामने आती रही है।

इस वर्ष सितंबर में जन्माष्टमी के अवसर पर भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पत्नी गीता शर्मा के साथ धार्मिक स्थलों पर पहुंचे थे। दोनों ने भरतपुर के पूंछरी का लौठा क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना की थी।

करवा चौथ के अवसर पर प्रदेशभर में महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु की कामना की। इस पर्व ने एक बार फिर राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों की झलक प्रस्तुत की।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी पत्नी गीता शर्मा का पिछले वर्षों में करवा चौथ मनाने का कार्यक्रम भी इन पारंपरिक मान्यताओं से जुड़ा रहा है। वर्ष 2026 के आयोजन की विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने पर ही इस बार की पूजा, चंद्रदर्शन और अन्य रस्मों के बारे में निश्चित रूप से बताया जा सकेगा।


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