Pink Toilet Controversy: मुंबई के फैशन स्ट्रीट के पास महिलाओं के ‘पिंक टॉयलेट’ में चल रहा था कैफे, विवाद के बाद BMC ने करवाया बंद; VIDEO

Pink Toilet Controversy: मुंबई के फैशन स्ट्रीट के पास महिलाओं के 'पिंक टॉयलेट' में चल रहा था कैफे, विवाद के बाद BMC ने करवाया बंद; VIDEO

(Photo Credits@BandhuNews_in)

Pink Toilet Controversy:  दक्षिण मुंबई के व्यस्त फैशन स्ट्रीट इलाके में महिलाओं की स्वच्छता के लिए शुरू की गई ‘पिंक टॉयलेट’ (Mahilasathi Swacchatagruha) सुविधा एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है. महिलाओं को सुरक्षित और सुलभ शौचालय प्रदान करने के लिए बनाई गई इस मोबाइल यूनिट के पिछले हिस्से में कथित तौर पर एक कैफे चलाया जा रहा था. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और स्वच्छता संबंधी चिंताएं बढ़ने के बाद, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस कैफे को बंद कर दिया है.

एक साल से चल रहा था अवैध कैफे

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएमसी द्वारा संचालित इस पिंक टॉयलेट बस में पिछले करीब एक साल से खाने-पीने का स्टॉल संचालित किया जा रहा था. सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के इस तरह के व्यावसायिक और अवैध उपयोग ने स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. टॉयलेट जैसी जगह के साथ किचन का संचालन करना स्वच्छता के लिहाज से बेहद खतरनाक माना जा रहा है.  यह भी पढ़े:  BMC Pink Toilet Row: मुंबई के फोर्ट इलाके में महिलाओं के ‘पिंक टॉयलेट’ में खुला कैफे, स्वच्छता को लेकर बीएमसी पर उठे सवाल

बीएमसी ने किया बंद

राजनीतिक दखल और दावों का विवाद

इस मामले में तब नया मोड़ आया जब कैफे की मैनेजर गीता मेहर ने दावा किया कि उन्हें स्थानीय कॉर्पोरेटर मकरंद नार्वेकर ने इसे चलाने की अनुमति दी थी. मैनेजर ने स्वीकार किया कि उनके पास खुद का कोई आधिकारिक लाइसेंस या परमिट नहीं था.

दूसरी ओर, विधायक राहुल नार्वेकर के लेटरहेड पर जारी एक पत्र में मेहर के प्रबंधन का जिक्र तो है, लेकिन इसमें किसी व्यावसायिक आउटलेट को चलाने की कानूनी मंजूरी नहीं दी गई थी. इस पर स्पष्टीकरण देते हुए नार्वेकर ने कहा कि उनकी सिफारिश केवल नियमानुसार आवेदन पर विचार करने तक सीमित थी. उन्होंने साफ किया कि बिना वैध अनुमति के किसी भी संचालन का वे समर्थन नहीं करते और यह बीएमसी के अधिकार क्षेत्र का मामला है.

बीएमसी की सख्त कार्रवाई

मीडिया में मामला तूल पकड़ने के बाद, बीएमसी के ‘ए वार्ड’ के अधिकारियों ने गुरुवार रात को इस खाद्य इकाई पर छापेमारी की. निगम ने बिना अनिवार्य मंजूरी और लाइसेंस के चल रहे इस कैफे को बंद कर दिया और वहां से किचन का सारा सामान जब्त कर लिया है. बीएमसी के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि जियो-टैग्ड सबूतों के साथ प्रवर्तन की कार्रवाई पूरी कर ली गई है.

सार्वजनिक सुविधाओं के दुरुपयोग पर सवाल

पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाओं का उद्देश्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में महिलाओं को चेंजिंग रूम और शौचालय जैसी आवश्यक सेवाएं देना है. लेकिन इस घटना ने यह उजागर कर दिया है कि कैसे नगर निगम की संपत्तियों का दुरुपयोग व्यावसायिक लाभ के लिए किया जा रहा है. फिलहाल, एनजीओ और इस सुविधा के प्रबंधन से जुड़े लोगों को भविष्य में ऐसी गतिविधियों को रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं.




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