सुखासन आसन से करें थकान, स्ट्रेस, टेंशन, एंग्जाइटी और डिप्रेशन को दूर

सुखासन जैसा की नाम से ही जाहिर है सुख देने वाला आसन। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो जिस आसन को करते वक़्त सुख की अनुभूति हो उसे सुखासन कहा जाता है। आसनों में यह आसन सबसे सरल है। इसलिए जो साधक योग की शुरुवात कर रहे हैं उनके लिए ये आसन सही माना गया है। प्राणायाम एवं ध्यान साधने के लिए सुखासन को लाभप्रद आसन माना गया है। मन एवं चित्त को एकाग्र करने के लिए यह उत्तम आसनों में से एक है। यह आसन बेहद सरल एवं सहज होने की वजह से इसे हर कोई कर सकता है।
सामन्य रूप से जैसे हम अक्सर अपने घर में आलती- पालथी मारकर बैठते हैं , ठीक उसी प्रकार से बैठना ही सुखासन है। आलती- पालथी मारकर बैठने से दोनों घुटने 90 डिग्री पर मुड़ते हैं, जिससे पैरों में रक्त संचार कम होकर अतिरिक्त रक्त शरीर के अन्य भागों में पहुंच जाता है एवं उन्हें क्रियाशील बनाये रखता है। इस आसन को करने से छाती पैर और मेरुदंड सुदृढ़ बनते हैं।
सुखासन करने की विधि:
सुखासन करने की विधि समतल जमीन पर आसान बिछाकर पालथी मोड़कर बैठ जाएं। ध्यान रहें के सिर ,गर्दन और पीठ ,एक ही सीध में हो। कंधो को थोड़ा ढीला छोड़े। दोनों हाथों को दोनो घुटनों के ऊपर ज्ञानमुद्रा में रखें। सिर को थोड़ा ऊपर उठाये और आँखे कोमलता से बंद कर लें। चेहरे पर प्रसन्नता के भाव रखें , किसी प्रकार का कोई तनाव न हों। अब अपना ध्यान अपनी श्वसन क्रिया पर लगाएं और लम्बी और गहरी सांस लेते रहें। इस आसन को कभी भी एकांत में बैठकर 5-10 मिनट तक कर सकते हैं।
- सुखासन के फायदे:
- सुखासन का अभ्यास करने से आपको अपनी रीढ़ को स्ट्रेच करने में मदद मिलती है। यह रीढ़ को लंबा करने में मदद करता है।
- यह आसन आपके कॉलर बोन और छाती को चौड़ा करता है।
- टखनों को खोलने में मदद करता है।
- कमर की मांसपेशियों को मजबूत करता है और आपके शरीर की मुद्रा(पोस्चर) को सुधारता है।
- यह आसन आपके शरीर में शारीरिक और मानसिक संतुलन बनाने में मदद करता है।
- टखनों, घुटनों और कूल्हों के जोड़ों का लचीलापन बढ़ाता है।
- इसका अभ्यास उन लोगों के लिए अधिक बेहतर है जिनका शरीर कठोर है।
- थकान को कम करने में मदद करता है। काम के बाद आप सुखासन का अभ्यास कर सकते हैं।
- कमर और गर्दन को स्ट्रेच करने में मदद करता है।
- यह आपके घुटनों, पिंडली की मांसपेशियों और जांघों को मसाज करने में मदद करता है।




