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बेशर्म अधिकारी ; गांव बूंद बूंद पानी को तरस रहा और लाखों लीटर पानी बहा दिया

कांकेर।  जिले के पखांजूर में एक फ़ूड इंस्पेक्टर अधिकारी का मोबाइल पिकनिक मनाने के दौरान सेल्फी लेते वक्त परलकोट जलाशय के स्पिलवे में बने टैंक में गिर जाता है  जिसके बाद फूड इंस्पेक्टर अधिकारी द्वारा टैंक से 48 घंटे लगातार डीजल पंप के द्वारा 41 लाख लीटर पानी को बर्बाद कर अपना महंगा फोन निकाला जाता है जिसके बाद से पूरे देश में फूड इंस्पेक्टर साहब के द्वारा लाखों लीटर पानी बर्बाद करने का यह मामला सुर्खियां बन जाती है। कांकेर जिला कलेक्टर द्वारा फूड इंस्पेक्टर साहब को सस्पेंड कर दिया जाता है। जिसके बाद फूड इंस्पेक्टर साहब का बयान आता है कि उनके द्वारा अनुपयोगी पानी को उपयोगी बनाया गया हैं। अब जहां पर फूड इंस्पेक्टर साहब के मोबाइल फोन के लिए 41 लाख लीटर पानी को बर्बाद किया जाता है वहां से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर बसा बोगानभोड़िया गांव के ग्रामीण झरिया के गंदे पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर है।

दरअसल कोयलीबेड़ा ब्लॉक के बोगानभोड़िया गांव में लगभग 30 परिवार निवास करते हैं और लगभग 100 से अधिक लोग पीने के पानी के लिए एक ही नल पर निर्भर हैं और इस गांव का एक मात्र नल विगत 4 माह से खराब है जिसके चलते यहां के ग्रामीणों को मजबूरन झरिया का गन्दा पानी पीना पड़ रहा हैं। ग्रामीण गांव से कुछ दूरी पर स्थित झरिया में सुबह अपने घरों से बर्तन लेकर पहुंचते हैं और झरिया के पानी को केवल सादाहरण कपड़े की सहायता से छानकर बर्तनों में भरते हैं और फिर इसी गंदे पानी से वे अपना और अपने परिवार की प्यास बुझाते हैं। अधिकारियों और सरकार से लगातार ग्रामीण नल के सुधार के लिए गुहार लगाते रहे परंतु अब तक उनकी पुकार ना अधिकारियों ने सुनी ना ही सरकार ने जिसके चलते उन्हें मजबूरन आज भी झरिया का गंदा पानी पीना पड़ रहा है। झरिया के गंदे पानी में मछली और मेंढक तैरते हुए दिखाई देते हैं, पानी से बदबू आती है और आसपास में बेहद गंदेगी भी जमा होता है जिससे इस पानी को पीकर ग्रामीण और बच्चे लगातार बीमार पड़ रहे हैं। जहां महज एक मोबाइल फोन के लिए लाखों लीटर पानी को बर्बाद किया जाता है वहीं दूसरी ओर झरिया के गंदा पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर इन ग्रामीणों की ये तस्वीर शासन की नाकामी को दर्शाता हैं।अब देखना लाजमी होगा कि सरकार कब तक इन बेबस ग्रामीणों के लिए एक अदद नल की व्यवस्था करती है और कब तक ग्रामीणों को साफ पीने का पानी मिल पाता है।

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