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देखिए वीडियो, नेत्रहीन बछड़ी सुरीली जो राधा-कृष्ण का भजन सुनते ही थिरकने लगती है
रायपुर। गोठान में सैकड़ों गोवंश की मौजूदगी, परिसर में गूंजता भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी का भजन ‘कृपा बरसाए रखना…’ और उसपर थिरकती डेढ़ महीने की नेत्रहीन बछिया सुरीली। नजारा राजधानी के गोकुल नगर गोठान का है, जहां भगवान श्रीकृष्ण का भजन शुरू होते ही डेढ़ महीने की बछिया सुरीली के कदम थिरकते लगते हैं। वह गर्दन ऊपर उठाकर नाचने लगती है। मानो भगवान की आराधना में तल्लीन हो। उसका यह अंदाज देखने वालों को भी चकित कर देता है।
यूं तो सुरीली देख नहीं सकती। उसकी उम्र भी मात्र सवा महीने है। इसलिए उसे अपने आसपास के वातावरण और उसकी देखरेख करने वालों की उतनी समझ नहीं है। वह कुछ समझती है, तो वह भगवान का भजन है, जिसकी धुन बजते ही उसके कदम थिरकने लगते हैं।
https://youtube.com/shorts/ktd74Scux5I
जन्म से ही नेत्रहीन है सुरीली
गोकुल नगर गोठान में 400 गोवंश हैं। इनमें 20 से 25 बछड़े भी हैं, लेकिन सुरीली ही ऐसी है, जिसे जन्म से ही दिखाई नहीं देता। इसके बाद भी वह सामान्य ढंग से विचरण करती है। उसका खानपान भी सामान्य है, लेकिन उसका भजन पर नृत्य का अंदाज उसे अलग बनाता है और इसी अंदाज को देखने के लिए अब लोग भी गोठान पहुंचने लगे हैं। जैसे ही गोठान में भजन चलता है वह अपना गर्दन ऊपर उठाकर नाचने लगती है। तब तक उसके कदम नहीं रुकते, जब तक भजन बंद नहीं हो जाता। नाचते-नाचते उसकी आंखें भीग जाती है।
खतरा भांपकर सचेत हो जाती है मां
गोकुल नगर गोठान के संचालक रितेश अग्रवाल बताते हैं, सुरीली की मां भी उतनी ही संवेदनशील है। जैसे ही कोई सुरीली की ओर बढ़ता है, वह सचेत हो जाती है। खतरा महसूस होते ही वजह किसी को उसके पास भी नहीं आने देती। अधिकतर समय वह सुरीली को अपने पास ही रखती है। चुंकि डेढ़ महीने की यह बछिया नेत्रहीन है, इसलिए गोठान में काम करने वाले लोग भी उसकी देखभाल बाकी बछड़ों से अधिक करते हैं। गोठान में एक और बछड़ा नेत्रहीन है, लेकिन उसे आक्रामक होने की वजह से खुले स्थान में नहीं रखा जाता।
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