Paneer Substitutes: महाराष्ट्र में FDA की सख्ती, 1 मई से रेस्टोरेंट्स को मेन्यू में बताना होगा असली पनीर है या चीज

Paneer Substitutes: महाराष्ट्र में FDA की सख्ती, 1 मई से रेस्टोरेंट्स को मेन्यू में बताना होगा असली पनीर है या चीज

Paneer Substitutes:  महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने उपभोक्ता पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. नए आदेश के अनुसार, 1 मई 2026 से राज्य के सभी रेस्टोरेंट, होटल और फास्ट फूड आउटलेट्स के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने मेनू कार्ड और डिस्प्ले बोर्ड पर स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि किसी व्यंजन में असली पनीर या चीज का उपयोग किया गया है या उनके विकल्पों (Analogue) का. यह निर्णय उन शिकायतों के बाद लिया गया है जिनमें ग्राहकों को असली पनीर के नाम पर सस्ते विकल्प परोसे जा रहे थे.

‘चीज एनालॉग’ और ‘पनीर विकल्प’ का खुलासा अनिवार्य

खाद्य सुरक्षा आयुक्त श्रीधर दुबे-पाटिल द्वारा घोषित इस निर्देश के तहत अब केवल विज्ञापनों में ही नहीं, बल्कि ग्राहकों को दिए जाने वाले बिलों पर भी यह जानकारी देनी होगी. यदि किसी डिश में दूध से बने पनीर के बजाय वनस्पति तेल या स्टार्च से बने ‘एनालॉग’ का उपयोग किया गया है, तो उसे स्पष्ट रूप से “चीज एनालॉग” या “डेयरी एनालॉग” के रूप में अंकित करना होगा.  यह भी पढ़े: Coldrif Row: MP-राजस्थान में बच्चों की मौत के बाद महाराष्ट्र FDA का बड़ा एक्शन, कोल्डरिफ सिरप बैच SR-13 पर स्टॉप-यूज को लेकर भेजा नोटिस

क्या होते हैं पनीर और चीज एनालॉग?

सामान्य पनीर और चीज शुद्ध दूध से बनाए जाते हैं. इसके विपरीत, ‘एनालॉग’ उत्पादों को खाद्य तेलों (Edible Oils), स्टार्च और इमल्सीफायर के मिश्रण से तैयार किया जाता है. हालांकि एफडीए ने स्पष्ट किया है कि ये उत्पाद स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित नहीं हैं, लेकिन इन्हें असली डेयरी उत्पादों के रूप में बेचना उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है. पारदर्शिता की कमी के कारण ग्राहक अक्सर अनजाने में इन विकल्पों का सेवन करते हैं.

कानूनी प्रावधान और कड़े नियम

यह आदेश खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI), 2006 के तहत जारी किया गया है. इसके साथ ही, निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं को खाद्य सुरक्षा और मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) विनियम, 2020 का भी पालन करना होगा. इसके तहत पैकेज्ड उत्पादों पर स्पष्ट और सटीक लेबलिंग सुनिश्चित करना अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ता सूचित विकल्प चुन सकें.

नियमों के उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि 1 मई से लागू होने वाले इन नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसमें भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं. अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को भी सलाह दी है कि वे बाहर खाना खाते समय मेनू पर दी गई जानकारी को ध्यान से पढ़ें और संदेह होने पर स्पष्टीकरण मांगें.

पारदर्शिता की ओर बढ़ता कदम

इस पहल का उद्देश्य मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में खाद्य क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है. कई बार लागत कम करने के लिए विक्रेताओं द्वारा इन विकल्पों का सहारा लिया जाता है, जिससे ग्राहकों को पोषण के नाम पर सही उत्पाद नहीं मिल पाता. अब नए नियमों के बाद, ग्राहकों को यह स्पष्ट पता होगा कि उनकी थाली में परोसा गया पनीर असली डेयरी उत्पाद है या लैब में तैयार किया गया विकल्प.




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