Who Is Tukaram Mundhe: कौन हैं तुकाराम मुंढे, मिलावट और गुटखा माफिया पर कार्रवाई करने वाले IAS अधिकारी जिनके तबादले को लेकर मचा है सियासी बवाल

Who Is Tukaram Mundhe: कौन हैं तुकाराम मुंढे, मिलावट और गुटखा माफिया पर कार्रवाई करने वाले IAS अधिकारी जिनके तबादले को लेकर मचा है सियासी बवाल

Tukaram Munde

Who Is Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं. महाराष्ट्र विधानसभा में उनके संभावित तबादले को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. एनसीपी (शरद पवार) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने आरोप लगाया कि तुकाराम मुंढे का तबादला कराने के लिए एक “अंतरराष्ट्रीय ड्रग लॉबी” ने 250 करोड़ रुपये जुटाए हैं. हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल उन्हें हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. इस पूरे घटनाक्रम के बाद तुकाराम मुंढे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं. Mumbai Local Train Murder: रोशन सुवर्णा के परिवार का दावा- ‘सोशल मीडिया ट्रायल’ से नौकरी और सामान्य जिंदगी पर पड़ रहा असर

कौन हैं तुकाराम मुंढे?

तुकाराम हरिभाऊ मुंढे महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं. उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. उनके पिता हरिभाऊ मुंढे छोटे किसान थे, जबकि उनकी मां असराबाई मुंढे ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच परिवार की जिम्मेदारी संभाली. बचपन में तुकाराम मुंढे ने जिला परिषद स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ खेतों में भी काम किया.

उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वर्ष 2004 की UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल कर IAS अधिकारी बने.

कई जिलों में निभाई अहम जिम्मेदारियां

करीब दो दशक के प्रशासनिक करियर में तुकाराम मुंढे ने नांदेड़, वाशिम, जालना, सोलापुर, नवी मुंबई, नासिक, नागपुर और पुणे समेत कई जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. उन्होंने सहायक कलेक्टर, जिला कलेक्टर, नगर आयुक्त, PMPML के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक सहित कई अहम पदों पर काम किया है.

सोलापुर के जिला कलेक्टर रहते हुए उन्होंने जल प्रबंधन और पारदर्शी प्रशासन के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया. इसके लिए उन्हें वर्ष 2015-16 का बेस्ट डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर अवॉर्ड भी मिला. जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ के नाम से भी जाना जाता है.

बार-बार तबादलों के लिए भी रहे चर्चित

तुकाराम मुंढे अपने सख्त प्रशासनिक रवैये के कारण अक्सर चर्चा में रहे हैं. नियमों के कड़ाई से पालन, अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई और किसी भी तरह के दबाव में न आने की छवि के चलते उनका कई बार तबादला हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 20 साल के करियर में उनका 24 से अधिक बार ट्रांसफर किया जा चुका है.

FDA आयुक्त बनने के बाद तेज हुई कार्रवाई

FDA आयुक्त का कार्यभार संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने मिलावटी खाद्य पदार्थों, गुटखा और पान मसाला माफिया के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया.

महज पहले महीने में विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में 904 छापेमारी की और 34.66 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला जब्त किया. विभाग ने संगठित गुटखा गिरोहों के खिलाफ मकोका (MCOCA) लगाने की संभावना भी जताई है.

इसके अलावा होटल, रेस्तरां और ढाबों को ग्राहकों को मुफ्त स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए. अस्पतालों को भी मरीजों को किसी विशेष मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर नहीं करने का आदेश जारी किया गया. खाद्य पदार्थों में मिलावट, नकली डेयरी उत्पाद, मावा, खाद्य तेल और ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म पर भी विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है. विभाग के अनुसार, इस अभियान के दौरान कई प्रतिष्ठानों को सील किया गया, 457 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 42 वाहन जब्त किए गए.

तबादले को लेकर क्यों मचा है विवाद?

महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी (शरद पवार) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने आरोप लगाया कि तुकाराम मुंढे का तबादला कराने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग लॉबी ने 250 करोड़ रुपये जुटाए हैं. उन्होंने दावा किया कि खाद्य और दवा क्षेत्र में कार्रवाई से प्रभावित कुछ प्रभावशाली लोग और भ्रष्ट अधिकारी उनसे नाराज हैं.

हालांकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि तुकाराम मुंढे के तबादले का फिलहाल कोई सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने विभाग में संसाधनों की कमी का जिक्र करते हुए मुंढे के कामकाज की सराहना भी की.

इस बीच भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार और शिवसेना विधायक अर्जुन खोतकर समेत कई नेताओं ने भी मुंढे का समर्थन किया है. वहीं सांगली सहित कई जगहों पर लोगों ने उनके समर्थन में प्रदर्शन कर उन्हें कम से कम तीन साल तक FDA आयुक्त बनाए रखने की मांग की है.




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