आत्मनिर्भर भारत को लेकर PM मोदी का बड़ा बयान
भारत अब तकनीक अपनाने वाला नहीं, बनाने वाला देश बन रहा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पहले दुनिया के दूसरे देशों में नई तकनीक विकसित होती थी और कुछ वर्षों बाद वह भारत तक पहुंचती थी। भारत उस तकनीक को अपनाता था या उसमें सुधार करके आगे बढ़ाता था।उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं। देश का लक्ष्य केवल दूसरों द्वारा विकसित तकनीकों का उपयोग करना नहीं, बल्कि नई तकनीक तैयार करना और उसके विकास की दिशा निर्धारित करना है।प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ऐसी वैज्ञानिक क्षमताएं विकसित करना चाहता है, जो देश की जरूरतों को पूरा करने के साथ वैश्विक चुनौतियों का समाधान भी प्रस्तुत कर सकें।
प्राचीन वैज्ञानिक विरासत का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऐतिहासिक वैज्ञानिक उपलब्धियों को याद करते हुए कहा कि देश का विज्ञान और नवाचार से संबंध सदियों पुराना है।उन्होंने शून्य की अवधारणा, गणितीय पद्धतियों और खगोल विज्ञान में भारत के योगदान का उल्लेख किया।प्रधानमंत्री के अनुसार, प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
कोरोना काल में भारत ने दिखाई अपनी क्षमता
चंद्रयान और मंगल मिशन की उपलब्धियों को सराहा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।उन्होंने कहा कि भारत ने पहले ही प्रयास में मंगल ग्रह की कक्षा तक पहुंचकर अपनी वैज्ञानिक क्षमता दिखाई। इसके अतिरिक्त चंद्रयान-3 मिशन के माध्यम से भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बना।उन्होंने इन उपलब्धियों को भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा, परिश्रम और नवाचार क्षमता का प्रमाण बताया।प्रधानमंत्री ने युवाओं से नई तकनीकों को विकसित करने और वैश्विक वैज्ञानिक अनुसंधान में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण बातें कहीं।उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए परमाणु ऊर्जा की बड़ी आवश्यकता होगी। परमाणु ईंधन के आयात पर निर्भरता ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौती है।प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक को विकसित करने पर काम कर रहा है।उन्होंने 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की पहली क्रिटिकैलिटी हासिल करने को महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि बताया।उनके अनुसार, ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता से भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
AI और बायोटेक्नोलॉजी सहित 12 विषयों पर चर्चा
27 से 29 अक्टूबर तक आयोजित तीन दिवसीय ESTIC 2026 में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योग प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया है।सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य, ऊर्जा, जलवायु विज्ञान, विनिर्माण और महासागर विज्ञान सहित 12 प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हो रही है।कार्यक्रम में करीब 150 डीप-टेक स्टार्टअप के स्टॉल और 300 से अधिक प्रतिभागियों वाला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्किंग कार्यक्रम भी शामिल है।
विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण वैज्ञानिक अनुसंधान, नई खोजों और नवाचार की मजबूत नींव पर होगा।उन्होंने युवाओं की प्रतिभा और आत्मविश्वास पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत को भविष्य की तकनीकों को अपनाने के साथ उन्हें विकसित करने में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।प्रधानमंत्री के संबोधन में स्वदेशी तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को देश के दीर्घकालिक विकास की प्रमुख जरूरतों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
Source link



