आयकर विभाग का बड़ा खुलासा, 5121 करोड़ की कर चोरी
जांच के दौरान कुल 26,628 बैनामों से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। इनमें से 9144 मामलों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने की जानकारी मिली है। कई बैनामों में खरीदार और विक्रेता के पैन कार्ड तथा संपत्ति से संबंधित जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। वहीं, हजारों मामलों का रिकॉर्ड भी विभाग को नहीं मिला। हालांकि, 5121 करोड़ रुपये की रकम को पूरी तरह प्रमाणित कर चोरी मानना अभी सही नहीं होगा। यह उन वित्तीय लेनदेन का मूल्य है, जिनकी रिपोर्टिंग या सत्यापन का काम पूरा नहीं हुआ है।
46 रजिस्ट्री कार्यालयों की जांच में बड़ा खुलासा
आयकर विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संपत्तियों की रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच की।इस अभियान में लखनऊ और आसपास के जिलों के साथ नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों के रजिस्ट्री कार्यालय भी शामिल रहे।
जांच का उद्देश्य अचल संपत्तियों की खरीद-बिक्री में होने वाले बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी का सत्यापन करना था।विभाग ने पाया कि कई मामलों में संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़ी जरूरी सूचनाएं आयकर विभाग को समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।इससे संबंधित खरीदारों, विक्रेताओं और वित्तीय लेनदेन की जांच प्रभावित हुई।
4311 बैनामों में जरूरी जानकारी नहीं मिली
जांच में 4311 ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए, जिनकी निर्धारित रिपोर्टिंग नहीं हुई थी।इनका कुल मूल्य लगभग 2747.50 करोड़ रुपये बताया गया है।कई मामलों में संपत्ति खरीदने और बेचने वालों के पैन कार्ड तथा अन्य आवश्यक विवरण उपलब्ध नहीं थे।
बैनामों में अधूरी जानकारी मिलने के कारण विभाग के सामने यह चुनौती खड़ी हुई कि संबंधित संपत्तियों का वास्तविक लेनदेन किस तरह हुआ था।आयकर विभाग ने ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं से जानकारी उपलब्ध कराने को कहा।विभागीय स्तर पर नोटिस जारी कर रिकॉर्ड की त्रुटियां दूर करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
1714 मामलों में 1160.75 करोड़ की रिपोर्टिंग सुधारी गई
आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद कई मामलों में वित्तीय रिकॉर्ड दुरुस्त किए गए।अधिकारियों के अनुसार, 1714 लेनदेन की कुल 1160.75 करोड़ रुपये की रिपोर्टिंग में सुधार कराया गया है।
इसका अर्थ है कि पहले जिन लेनदेन की सूचना सही तरीके से उपलब्ध नहीं थी, उनमें आवश्यक जानकारी दर्ज कराई गई।विभाग ने संबंधित संस्थाओं को वित्तीय लेनदेन की रिपोर्टिंग समय पर और सही प्रारूप में करने के निर्देश दिए हैं।इस प्रक्रिया से भविष्य में संदिग्ध संपत्ति लेनदेन की पहचान और जांच करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
3119 बैनामों का रिकॉर्ड नहीं मिलने से बढ़ी चिंता
14 हजार करोड़ से अधिक के लेनदेन में मिली थीं त्रुटियांजांच के दौरान कुल 14,414.82 करोड़ रुपये मूल्य के 26,628 वित्तीय लेनदेन में रिपोर्टिंग संबंधी त्रुटियां सामने आई थीं।इसके बाद विभाग ने संबंधित संस्थाओं को रिकॉर्ड ठीक करने के निर्देश दिए।अब तक 17,487 लेनदेन की रिपोर्टिंग में सुधार कर लगभग 9293.06 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड दुरुस्त किए जा चुके हैं।इसके बावजूद 5121.76 करोड़ रुपये मूल्य के लेनदेन से संबंधित रिपोर्टिंग का मामला लंबित है।यह आंकड़ा दर्शाता है कि बड़ी मात्रा में वित्तीय जानकारी का सत्यापन और सुधार अभी बाकी है।
आयकर विभाग के अधिकारियों ने दी जानकारी
शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के अशोक मार्ग स्थित आयकर भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में विभाग के संयुक्त निदेशक सोनल सिंह ने जांच से संबंधित जानकारी दी।उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में विभिन्न रजिस्ट्री कार्यालयों का निरीक्षण किया गया।
जांच में सामने आई गड़बड़ियों को लेकर संबंधित विभागों और संस्थाओं से जवाब मांगा गया है।आयकर विभाग ने स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका से संबंधित जानकारी भी राज्य सरकार को उपलब्ध कराई है।जिन मामलों में अधिकारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनमें नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के कर्मचारियों पर भी नजर
आयकर विभाग की जांच केवल संपत्ति खरीदने और बेचने वालों तक सीमित नहीं है।रजिस्ट्री कार्यालयों में दस्तावेजों की जांच और निर्धारित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में है।
राज्य के स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख सचिव अमित गुप्ता ने बताया कि आयकर विभाग के अधिकारियों के साथ इस विषय पर बैठकें हुई हैं।उन्होंने कहा कि पुराने बैनामों में मिली अनियमितताओं की जानकारी सामने आई है।जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
45 लाख रुपये की संपत्ति के लेनदेन की रिपोर्टिंग पर जोर
आयकर विभाग ने बड़ी संपत्तियों की खरीद-बिक्री में पैन और वित्तीय विवरणों की सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार, 45 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्तियों के लेनदेन से संबंधित रिपोर्टिंग की निगरानी की जा रही है।संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान खरीदार और विक्रेता की पहचान तथा वित्तीय जानकारी का सही दर्ज होना आवश्यक है।इन दस्तावेजों के आधार पर आयकर विभाग संपत्ति खरीदने वाले व्यक्ति की घोषित आय और लेनदेन का मिलान कर सकता है।इससे कर नियमों का पालन सुनिश्चित करने और संभावित कर चोरी की जांच में सहायता मिलती है।
बैंकों के वित्तीय लेनदेन की भी जांच
संपत्ति रजिस्ट्री के अलावा आयकर विभाग ने कुछ बैंकों की वित्तीय रिपोर्टिंग में भी कमियां मिलने की जानकारी दी है।अधिकारियों के अनुसार, ग्राहकों को दिए गए ब्याज से संबंधित विशेष वित्तीय लेनदेन विवरण यानी एसएफटी की रिपोर्टिंग में भी त्रुटियां पाई गई हैं।
इसके अलावा बैंक खातों में नकद जमा और निकासी, सावधि जमा, शेयरों में निवेश तथा क्रेडिट कार्ड से संबंधित बड़े लेनदेन पर भी निगरानी रखी जा रही है।विभाग का उद्देश्य निर्धारित सीमा के अंतर्गत आने वाले लेनदेन की सही जानकारी प्राप्त करना है।रिपोर्टिंग में लापरवाही होने पर संबंधित संस्थाओं के खिलाफ नियमों के अनुसार जुर्माना लगाया जा सकता है।
रजिस्ट्री व्यवस्था को ऑनलाइन करने पर जोर
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने वित्तीय रिकॉर्ड के आदान-प्रदान में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता जताई है।प्रमुख सचिव अमित गुप्ता के अनुसार, मैनुअल तरीके से जानकारी उपलब्ध कराने में गलतियां होने की संभावना रहती है।
इसी वजह से संबंधित विभागों के बीच डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड साझा करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।ऑनलाइन व्यवस्था के माध्यम से संपत्ति खरीद-बिक्री की जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज और उपलब्ध कराई जा सकती है।इससे संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में भी मदद मिलेगी।
गड़बड़ी वाले मामलों में आगे बढ़ेगी जांच
फिलहाल करीब 5121 करोड़ रुपये के लेनदेन की रिपोर्टिंग लंबित है। इन मामलों की जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कर देनदारी और संभावित राजस्व नुकसान की स्थिति स्पष्ट होगी।
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