एकादशी पर विशेष ‘महादीप आलती’, भगवान जगन्नाथ के समक्ष पवित्र कर शिखर पर चढ़ाया गया महादीप

महादीप तैयार होने के बाद उसे सीधे मंदिर के शिखर पर नहीं ले जाया जाता। सबसे पहले भगवान जगन्नाथ के समक्ष उसे पवित्र करने की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की जाती है। मंदिर के सेवायत निर्धारित परंपराओं और विधि-विधान के अनुसार इस अनुष्ठान को संपन्न करते हैं। भगवान जगन्नाथ के समक्ष महादीप को पवित्र किए जाने के बाद विशेष आलती की जाती है। इसके बाद महादीप को श्रीमंदिर के शीर्ष तक ले जाने की प्रक्रिया शुरू होती है। मंदिर के शिखर पर पहुंचने के बाद महादीप की ज्योति दूर से भी दिखाई देती है और श्रद्धालु इसके दर्शन को बेहद शुभ मानते हैं।
पुरी श्रीमंदिर की धार्मिक परंपराओं में एकादशी का विशेष महत्व है। भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा से जुड़ी विभिन्न सेवाएं और अनुष्ठान सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार किए जाते हैं। महादीप आलती भी इन्हीं महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। एकादशी के अवसर पर श्रीमंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए महादीप के दर्शन विशेष आकर्षण रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के समक्ष पवित्र किए गए महादीप के दर्शन करना पुण्यदायी माना जाता है।
महादीप के श्रीमंदिर के शीर्ष पर पहुंचने के साथ ही मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण और गहरा हो जाता है। श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ का स्मरण करते हुए महादीप के दर्शन करते हैं। पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक परंपराओं, सेवाओं और अनुष्ठानों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। एकादशी पर होने वाली महादीप आलती इसी समृद्ध धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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