गढ़चिरौली में फर्जी नक्सली बैनर लगवाने का खुलासा, भाजपा समर्थित जनपद सदस्य समेत दो गिरफ्तार

कांकेर/गढ़चिरौली। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के पिपली-बुर्गी क्षेत्र में 12 जुलाई को लगाए गए कथित नक्सली बैनर और पोस्टर के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि इलाके में लगाए गए नक्सली बैनर-पोस्टर फर्जी थे। इस मामले में पुलिस ने भाजपा समर्थित जनपद सदस्य शिवा मिस्त्री और उसके सहयोगी रोहित मलिक को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी शिवा मिस्त्री कोयलीबेड़ा जनपद पंचायत के क्षेत्र क्रमांक-24 इरपनार से निर्वाचित सदस्य है। वह पहले भाजपा के वाडे मंडल का स्थायी आमंत्रित सदस्य भी रह चुका है। जनपद पंचायत चुनाव में भाजपा ने उसे अपना प्रत्याशी बनाया था।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस जांच के मुताबिक, शिवा मिस्त्री पीवी-111 बाड़े क्षेत्र का निवासी है और महाराष्ट्र सीमा से लगे इलाके में एक खनन कंपनी के लिए पोकलेन मशीन और परिवहन का कार्य करता था।
जांच में यह भी सामने आया कि वह लंबे समय से ग्रामीणों में नक्सलियों का डर दिखाकर अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता था। आरोप है कि वह नक्सल गतिविधियों के नाम पर ग्रामीणों को डराकर अपना दबदबा कायम रखता था।
काम छूटने के बाद रची साजिश
पुलिस का दावा है कि क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां कम होने और ग्रामीणों के विरोध के बाद संबंधित खनन कंपनी ने शिवा मिस्त्री को काम से हटा दिया था। इसके बाद उसने दोबारा इलाके में भय का माहौल बनाने और अपना प्रभाव स्थापित करने के उद्देश्य से फर्जी नक्सली बैनर और पोस्टर लगवाने की साजिश रची।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर शिवा मिस्त्री तथा उसके सहयोगी रोहित मलिक की पहचान की। दोनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इलाके में मचा हड़कंप
फर्जी नक्सली बैनर मिलने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच शुरू की, जिसके बाद यह खुलासा हुआ कि बैनर किसी नक्सली संगठन ने नहीं बल्कि आरोपियों ने खुद लगवाए थे।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में अन्य लोगों की भी भूमिका थी या नहीं। यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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