गरियाबंद में नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कठोर सजा, फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला

गिरीश गुप्ता गरियाबंद। गरियाबंद जिले में नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो एवं बलात्कार प्रकरण) ने कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर कुल 23 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने अपने फैसले में अपराध की गंभीरता, पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को महत्वपूर्ण आधार माना।
विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी के अनुसार, यह मामला थाना इंदागांव क्षेत्र का है। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि 19 मई 2025 की शाम वह अकेली नाले की ओर गई थी। इसी दौरान आरोपी धर्मेन्द्र उर्फ रामा ठाकुर (21 वर्ष) ने उसकी गर्दन पर चाकू टिकाकर जान से मारने की धमकी दी, मारपीट की और जबरन दुष्कर्म किया।
घटना के बाद पीड़िता ने घर पहुंचकर पूरी जानकारी अपने परिजनों को दी। इसके बाद थाना इंदागांव में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
जांच पूरी होने के बाद विवेचना अधिकारी उप पुलिस अधीक्षक गरिमा दादर, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस विकास पाटले तथा उप निरीक्षक जितेन्द्र कुमार विजयवार ने न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने मामले को मजबूत करने के लिए कुल 14 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (पॉक्सो एवं बलात्कार प्रकरण), गरियाबंद की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल की अदालत में हुई। न्यायालय ने पीड़िता के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया।
अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 4(1) के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये का अर्थदंड तथा धारा 115(2) के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 3 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया।
न्यायालय के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराधों पर कड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि नाबालिगों के साथ होने वाले यौन अपराधों में कानून सख्ती से कार्रवाई करता है और दोषियों को कठोर दंड दिया जाता है।
Source link



