जंगल में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई, 25 पंडो परिवारों के मकान पर चला बुलडोजर

Surajpur. सूरजपुर। Surajpur जिले के प्रेमनगर क्षेत्र स्थित महेशपुर जंगल में वन विकास निगम की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन ने राजस्व विभाग, वन विकास निगम और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह अभियान चलाया, जिसमें लगभग 25 पंडो जनजाति परिवारों के लकड़ी के मकानों को हटाया गया। प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित परिवारों को पिछले कई महीनों में 5 से 6 बार नोटिस जारी किए गए थे और कई बार समझाइश भी दी गई थी, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

जानकारी के अनुसार इससे पहले भी दो बार अतिक्रमण हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन विरोध के कारण कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी थी। इस बार प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शासकीय भूमि को खाली कराया। अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि वन विकास निगम की है और उस पर अवैध कब्जा किया गया था। इसलिए नियमानुसार कार्रवाई करना आवश्यक था। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि प्रभावित परिवारों को अपने मूल निवास स्थान पर लौटने के लिए कहा गया है।

घरेलू सामान की सुरक्षा और परिवहन के लिए वन विकास निगम की ओर से वाहनों की व्यवस्था भी की गई, ताकि परिवार अपना जरूरी सामान साथ ले जा सकें। हालांकि इस कार्रवाई के दौरान मौके पर भावुक दृश्य देखने को मिले। मकान गिराए जाने के समय महिलाएं रोती हुई नजर आईं, जबकि बच्चे खुले आसमान के नीचे खड़े रहे। अपने घर टूटने के बाद परिवारों ने सामान समेटकर सुरक्षित स्थान की तलाश शुरू कर दी। प्रभावित लोगों का आरोप है कि उन्हें वैकल्पिक पुनर्वास सुविधा दिए बिना ही बेघर कर दिया गया।

जिससे बरसात के मौसम में उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि अब उनके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा है। इधर, प्रशासन का तर्क है कि मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं था, इसलिए यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों के अनुसार यदि लगातार बारिश होती तो मानवीय आधार पर निर्णय लिया जाता। इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस ने इसे संवेदनहीन कार्रवाई बताते हुए पहले पुनर्वास सुनिश्चित करने की मांग की है।

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