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तेंदुए की तलाश में निकले वन अमले को मिला 2 लाख का अवैध सागौन, वन विभाग ने किया जब्त

Mohla-Manpur. मोहला-मानपुर। जिले में तेंदुए की लगातार मौजूदगी से जहां ग्रामीणों में दहशत का माहौल है, वहीं वन विभाग की टीम इस वन्य प्राणी की गतिविधियों को ट्रैक करने में दिन-रात जुटी हुई है। इसी बीच तेंदुए की तलाश कर रहे वन अफसरों के सामने एक ऐसा रोचक मोड़ आया, जिसने तेंदुए को भले सामने न लाया हो, लेकिन तेंदुए के पदचिन्हों के सहारे वन विभाग करोड़ों की सागौन तस्करी का पर्दाफाश करने में जरूर सफल हो गया।
घटना ग्राम पंचायत पुत्तरगोंदी के अंतर्गत ग्राम अमलीडीह की है, जहां बीते कई दिनों से तेंदुए की मौजूदगी देखी जा रही थी। इस पर पानाबरस वन विकास निगम के एसडीओ वीरेंद्र पटेल के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए के पदचिन्हों का पीछा करते हुए गांव के ही स्थानीय ग्रामीण अगनू राम कोरेटी की बाड़ी तक जा पहुंची। तेंदुआ तो नहीं मिला, लेकिन यहां वन अमले की नजर कुछ संदिग्ध लकड़ी के लट्ठों पर पड़ी।जांच करने पर पता चला कि अगनू राम कोरेटी की बाड़ी में करीब 70 नग सागौन के लट्ठे अवैध रूप से संग्रहित हैं। पूछताछ में अगनू राम ने दावा किया कि उसने ये सागौन अपने ही खेत से काटे हैं, लेकिन वह इसके लिए आवश्यक दस्तावेज—जैसे कटाई की अनुमति, भंडारण की स्वीकृति या राजस्व व वन विभाग की संस्तुति—प्रस्तुत नहीं कर पाया। ऐसे में संपूर्ण लकड़ी को अवैध घोषित करते हुए जब्त किया गया और उसे मोहला स्थित वन काष्ठागार में ले जाया गया।
एसडीओ वीरेंद्र पटेल ने बताया कि जब्त किए गए लकड़ी के लट्ठों का माप किया जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, जब्त लकड़ी की मूल्य लगभग दो लाख रुपये आँकी गई है। साथ ही मामले की जांच जारी है। यदि आरोपी अगनू राम द्वारा शीघ्र ही दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं, तो सागौन लट्ठों को राजसात कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ भारतीय वन अधिनियम की धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही भी की जाएगी। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सागौन संरक्षित इमारती लकड़ी की श्रेणी में आता है, और इसका कटान—चाहे वह निजी भूमि पर ही क्यों न हो—बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के गैरकानूनी है। इसके लिए राजस्व विभाग एवं वन विभाग दोनों की संयुक्त अनुमति आवश्यक होती है, जो इस मामले में नहीं ली गई थी।
यह संयोग ही था कि वन विभाग की टीम तेंदुए की तलाश में जिस दिशा में बढ़ी, उसी रास्ते में अवैध सागौन भंडारण का खुलासा हो गया। इस घटनाक्रम ने वन विभाग के सतर्कता अभियान की एक अलग तस्वीर पेश की है और साथ ही ग्रामीण इलाकों में हो रही अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी की गंभीरता को भी उजागर किया है। वन विभाग अब इस मामले में तथ्यों के आधार पर विस्तृत जांच कर रहा है और यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क का भी पर्दाफाश हो सकता है। ग्रामीणों से भी अपील की गई है कि वे वन संसाधनों की रक्षा में विभाग का सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल दें।




