बर्लिन में भारतीय वैज्ञानिकों और छात्रों से मिले पीयूष गोयल
भारतीय शोधकर्ताओं और छात्रों से की बातचीत
पीयूष गोयल ने बताया कि बर्लिन में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़े शोधकर्ताओं एवं छात्रों के साथ उनकी सार्थक बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीय प्रतिभाशाली युवाओं के लिए सहयोग व्यवस्था को और मजबूत बनाने संबंधी सुझाव सुने। उन्होंने भारतीय शोधकर्ताओं और छात्रों से विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। गोयल ने कहा कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ अपने अनुभव, ज्ञान और नवाचार के माध्यम से देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
भारतीय स्टार्टअप को अंतरराष्ट्रीय मंच देने का भरोसा
केंद्रीय मंत्री ने शोधकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में उनके प्रयासों को महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में मंच दिलाने के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के जरिए भारतीय प्रतिभाओं के काम को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने और भारत की विकास गाथा को प्रभावी तरीके से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा।
भारत-जर्मनी के बीच तकनीकी सहयोग पर जोर
पीयूष गोयल का जर्मनी दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, गोयल 22 से 24 अक्टूबर 2026 तक जर्मनी और इसके बाद 24 से 27 अक्टूबर तक नीदरलैंड की यात्रा पर हैं। उनके साथ लगभग 100 भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप का प्रतिनिधिमंडल भी है। इस दौरे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान दिया जा रहा है।
विकसित भारत के लक्ष्य में प्रवासी भारतीयों की भूमिका
गोयल ने बर्लिन में भारतीय समुदाय से भी संवाद किया। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों से युवाओं को मार्गदर्शन देने, छात्रवृत्ति के जरिए सहायता करने और अपने तकनीकी अनुभव साझा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में विदेशों में रहने वाले भारतीयों का योगदान महत्वपूर्ण हो सकता है।
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