यूपी-पंजाब और मणिपुर को लेकर खुफिया एजेंसियां अलर्ट, ISI पर नजर

नई दिल्ली। देश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। खुफिया सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) उत्तर प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में अशांति फैलाने की कथित योजना पर काम कर रही है। इन तीनों राज्यों को विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है। आशंका जताई गई है कि अलग-अलग राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों का फायदा उठाकर आतंकी गतिविधियों, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा भ्रामक सूचनाओं के जरिए माहौल खराब करने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि इन संभावित योजनाओं को लेकर सामने आई जानकारी खुफिया आकलन पर आधारित है और किसी नई साजिश के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

2027 में सात राज्यों में होंगे विधानसभा चुनाव

वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे बड़े राज्यों के चुनाव राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।

चुनावों से पहले सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों की समीक्षा कर रही हैं। खुफिया अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में अलग-अलग प्रकार की सुरक्षा चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

आशंका है कि देश विरोधी नेटवर्क चुनावी वातावरण का फायदा उठाकर हिंसा या अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से संदिग्ध गतिविधियों और विदेशी संपर्क वाले नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई है।

उत्तर प्रदेश में आतंकी हमलों और जासूसी की आशंका

खुफिया आकलन के अनुसार, उत्तर प्रदेश में आतंकी हमलों और जासूसी से संबंधित गतिविधियों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।अधिकारियों ने आशंका जताई है कि भीड़भाड़ वाले स्थानों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों को लेकर संदिग्ध नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं।

जांच एजेंसियों को पहले भी ऐसे नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली थी, जिन पर संवेदनशील स्थानों की निगरानी करने और बाहरी संचालकों को सूचनाएं उपलब्ध कराने के आरोप लगे हैं।

चुनावी माहौल में किसी भी प्रकार की हिंसक घटना कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों को देखते हुए सतर्क हैं।

पंजाब में हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी चिंता का विषय

पंजाब में पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा के कारण सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अलग हैं। यहां सीमापार से हथियार और नशीले पदार्थ भेजने के प्रयास पहले भी सामने आ चुके हैं।खुफिया अधिकारियों के अनुसार, कथित आईएसआई समर्थित नेटवर्क पंजाब में हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।

इसके अलावा छिटपुट ग्रेनेड हमलों और अलगाववादी गतिविधियों के जरिए कानून-व्यवस्था प्रभावित करने की आशंका भी जताई गई है।जुलाई 2026 में सामने आए खुफिया इनपुट में भी पंजाब में पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क द्वारा हिंसक घटनाओं की योजना बनाए जाने की आशंका व्यक्त की गई थी।

मणिपुर में पुराने तनाव का फायदा उठाने की आशंका

मणिपुर की सुरक्षा स्थिति को लेकर भी एजेंसियों ने चिंता जताई है। राज्य में वर्ष 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण

सामाजिक

तनाव और विस्थापन जैसी गंभीर समस्याएं सामने आई थीं।

हालांकि समय के साथ हिंसा की तीव्रता में कमी आई है, लेकिन विभिन्न समुदायों के बीच अविश्वास और विवाद से जुड़े कई मुद्दे पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।खुफिया आकलन में आशंका जताई गई है कि बाहरी तत्व इन परिस्थितियों का फायदा उठाकर भ्रामक सूचनाएं और अफवाहें फैला सकते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों से राज्य में दोबारा तनाव पैदा होने का खतरा हो सकता है। हालांकि मणिपुर में प्रस्तावित किसी विशिष्ट आईएसआई संचालित हमले की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

शहजाद भट्टी नेटवर्क का भी आया नाम

खुफिया सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान से संचालित कथित शहजाद भट्टी नेटवर्क की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं।इस नेटवर्क पर भारतीय युवाओं को आर्थिक प्रलोभन देकर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल करने के आरोप हैं।जांच एजेंसियों के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े लोगों पर हमलों की साजिश, हथियारों की तस्करी, जासूसी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप सामने आए हैं।

अगस्त 2026 में केंद्र सरकार ने इस नेटवर्क के खिलाफ बड़े अभियान की जानकारी दी थी।

14 राज्यों में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया था

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 17 अगस्त 2026 को बताया था कि शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया गया।12 अगस्त को चलाए गए अभियान के दौरान 14 राज्यों में कुल 253 लोगों को हिरासत में लिया गया था।इनमें उत्तर प्रदेश से 62, हरियाणा से 52, दिल्ली से 51 और पंजाब से 44 लोग शामिल थे।

सरकार के अनुसार, नेटवर्क से संबंधित मामलों में 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज हुई थीं और 200 से अधिक गिरफ्तारियां की गई थीं।कार्रवाई के दौरान विस्फोटक उपकरण, ग्रेनेड, पिस्तौल, कारतूस और जासूसी में इस्तेमाल किए जाने के संदेह वाले सीसीटीवी उपकरण बरामद किए गए थे।

चुनावी राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान

विधानसभा चुनावों के दौरान बड़ी संख्या में राजनीतिक सभाएं, रैलियां और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

ऐसे आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और पुलिस के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

संभावित खतरों को देखते हुए संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान जरूरी माना जा रहा है।हालांकि तीनों राज्यों में किसी नए विशेष सुरक्षा अभियान की तारीख या अतिरिक्त बलों की तैनाती का विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम सामने नहीं आया है।

अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं से भी खतरा

सुरक्षा एजेंसियों की चिंता केवल हिंसक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। चुनावी माहौल के दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली भ्रामक सूचनाएं भी कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।

विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में गलत जानकारी या भड़काऊ सामग्री के कारण तनाव बढ़ने की आशंका रहती है।ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन के लिए विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना और अफवाहों पर समय रहते ध्यान देना महत्वपूर्ण होता है।

शांतिपूर्ण चुनाव कराने की बड़ी चुनौती

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में संभावित सुरक्षा चुनौतियों को लेकर सामने आया खुफिया आकलन महत्वपूर्ण है।पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क के खिलाफ पहले की गई कार्रवाई से स्पष्ट है कि सुरक्षा एजेंसियां सीमापार से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रख रही हैं।हालांकि नए अलर्ट में व्यक्त आशंकाओं को किसी हमले या साजिश के निश्चित रूप से होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों के सामने संदिग्ध नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखने, खुफिया सूचनाओं की जांच करने और चुनावी राज्यों में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने की चुनौती है


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