शिवरीनारायण महोत्सव में बड़े ऐलान, महानदी पर बनेगा

शिवरीनारायण। CG NEWS: धार्मिक नगरी शिवरीनारायण में आवागमन और स्वच्छता की सुविधाएं बढ़ाने के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। महानदी पर 63 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से नया पुल बनाया जाएगा। नगर के गंदे पानी के शोधन के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी स्थापित होगा। इसके साथ ही शिवरीनारायण को नगरपालिका का दर्जा देने की संभावनाएं परखने के लिए सर्वे कराया जाएगा।
बुधवार, 14 अक्टूबर को तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने ये ऐलान किए। उन्होंने राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत नगर के विकास को आगे बढ़ाने की भी बात कही।

पुल और जल शोधन संयंत्र से बढ़ेंगी सुविधाएं
महानदी पर प्रस्तावित नए पुल से शिवरीनारायण और आसपास के गांवों के लोगों को आवाजाही में सुविधा मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक महत्व वाले इस नगर में स्थानीय नागरिकों और यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की जरूरतों के अनुसार बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
वहीं, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए इस्तेमाल हो चुके गंदे पानी का शोधन किया जाएगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह व्यवस्था नगर की स्वच्छता बेहतर करने के साथ महानदी के संरक्षण में भी सहायक होगी।
नगरपालिका के दर्जे पर सर्वे के बाद फैसला
शिवरीनारायण को नगरपालिका बनाने की मांग पर मुख्यमंत्री ने सर्वे कराने की घोषणा की है। इसमें नगर की जरूरतों और भविष्य में विस्तार की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा। फिलहाल नगरपालिका का दर्जा देने का अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सर्वे और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
धार्मिक पर्यटन से स्थानीय कारोबार को उम्मीद
मुख्यमंत्री ने शिवरीनारायण की पहचान माता शबरी की भक्ति और भगवान श्रीराम की वनगमन यात्रा से जुड़े स्थल के रूप में बताई। उन्होंने कहा कि राम वनगमन पर्यटन परिपथ के तहत यहां सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने श्रीरामलला दर्शन योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से लगभग 50 हजार श्रद्धालु अयोध्या जाकर दर्शन कर चुके हैं।
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने गौपूजन किया और मां चित्रोत्पला गंगा की महाआरती में शामिल होकर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने शिवरीनारायण की नियमित संध्या आरती को सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव का माध्यम बताया।
आवास, खेती और महिलाओं की सहायता पर रखे आंकड़े
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार गठन के बाद पहली मंत्रिपरिषद बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय लिया गया था। उनके मुताबिक, लगभग साढ़े 11 लाख आवास पूरे हो चुके हैं और प्रतिदिन करीब 1600 आवासों का निर्माण पूर्ण हो रहा है।
उन्होंने आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत होने और इनमें से 6 हजार उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी। विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम-जनमन योजना के तहत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जाने का भी उल्लेख किया।
किसानों के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करने और 250 से अधिक नए खरीदी केंद्र खोलने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा करने तथा महतारी वंदन योजना में पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये देने का भी जिक्र किया।
बस्तर में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बंद पड़े 421 स्कूल फिर शुरू किए गए हैं। नियद नेल्लानार योजना और अग्रणी बस्तर अभियान के जरिए दूरस्थ इलाकों तक सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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