सुशासन तिहार में मंत्री गुरु खुशवंत साहेब द्वारा

रायपुर / आरंग। CG VIDEO : नगर पालिका परिषद आरंग में जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली और लापरवाही एक बड़ा मुद्दा बनते जा रहा है। छग शासन की महत्वपूर्ण योजना सुशासन तिहार के तहत गत 08 मई को आरंग में हुए समाधान शिविर में क्षेत्रीय विधायक एवं केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने मंच से ही सीएमओ को कड़ी फटकार लगाते हुए वार्ड क्रमांक 13 में मिनी माता स्मृति भवन में सालों से बंद पड़े निर्माण कार्य को 02 दिन के अंदर शुरू करने के कड़े निर्देश दिए थे।साथ ही स्पष्ट कहा था कि यदि ठेकेदार निर्धारित समय सीमा में काम शुरू नहीं करता है तो उसका ठेका निरस्त कर नया टेंडर जारी किया जाए।
मंत्री के निर्देशों के कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी न तो अधूरा निर्माण कार्य शुरू हो सका और न ही ठेकेदार के विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई है। सीएमओ द्वारा जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही को नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. संदीप जैन ने गंभीरता से लेते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डॉ. जैन ने जिला कलेक्टर रायपुर को पत्र लिखकर सीएमओ पर मंत्री के निर्देशों की अवहेलना, जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा तथा मनमानीपूर्ण कार्यशैली अपनाने का आरोप लगाते हुए सख्त अनुशासनात्मक कड़ी कार्रवाई की मांग की है। नगर पालिका अध्यक्ष ने कलेक्टर को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने मंत्री के स्पष्ट निर्देशों को भी गंभीरता से नहीं लिया, जिससे आम जनता में शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुशासन तिहार के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे है।

डॉ. संदीप जैन ने अपने पत्र में केवल मिनी माता भवन का मुद्दा ही नहीं उठाया, बल्कि सीएमओ की कार्यशैली पर कई अन्य गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एएचपी (अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप) योजना के तहत आवास आबंटन की प्रक्रिया अध्यक्ष की अनुपस्थिति में पूरी कर दी गई, जो जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल और अधिकारों की अनदेखी है।इसके अलावा अध्यक्ष ने वर्ष 2026-27 के नगर पालिका बजट को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि बजट की कार्यवाही हेतु अध्यक्ष द्वारा 16 मार्च 2026 को लिखित निर्देश दिया गया था ताकि नियत समय में बजट परिषद में प्रस्तुत किया जा सके परन्तु नगर पालिका का वार्षिक बजट परिषद में नियत समय में पेश नही किया गया। नियमानुसार परिषद् में 31 मार्च 2026 तक प्रस्तुत किया जाना चाहिए था जो 27 अप्रेल की सामान्य सभा में प्रस्तुत किया गया।नगरपालिका अध्यक्ष ने आगे कहा कि लगातार जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज करने, महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध नहीं कराने तथा शासन के निर्देशों की अवहेलना करने से परिषद् की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर मुख्य नगर पालिका अधिकारी के विरुद्ध आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में शासन, परिषद और जनप्रतिनिधियों के निर्देशों का समयबद्ध पालन सुनिश्चित हो सके। नगर पालिका अध्यक्ष के इस कड़े तेवर से राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। तथा नगर पालिका के सीएमओ की अफसरशाही और लापरवाही पूर्ण कार्यप्रणाली ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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