Palghar News: पालघर के जव्हार गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, ‘न सड़क, न एंबुलेंस’, इलाज में देरी से 18 वर्षीय युवक की मौत; VIDEO

Palghar News: पालघर के जव्हार गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, ‘न सड़क, न एंबुलेंस’, इलाज में देरी से 18 वर्षीय युवक की मौत; VIDEO

(Photo Credits Keshav Bhumi News)

Palghar News:  महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक बार फिर बुनियादी ढांचे की बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी की दर्दनाक खबर सामने आई है. जव्हार तालुका के तिलौंडा (आंबेपाड़ा) गांव में सड़क न होने के कारण एक 18 वर्षीय आदिवासी युवक, शैलेश मगन वागडडा की मंगलवार (4 फरवरी) तड़के मौत हो गई. यह घटना उस समय हुई जब गंभीर रूप से बीमार शैलेश को अस्पताल ले जाने के लिए गांव तक कोई एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी.

4 किलोमीटर तक डोली में ढोया गया मरीज

तिलौंडा गांव एक पहाड़ी और दुर्गम इलाके में स्थित है, जहां मुख्य सड़क से करीब 4 किलोमीटर तक कोई पक्का रास्ता नहीं है. शैलेश की तबीयत बिगड़ने पर गांव वालों ने उसे कपड़े और लकड़ी से बनी एक अस्थायी डोली (पालकी) में लिटाया. उबड़-खाबड़ रास्तों और पथरीली पहाड़ियों के बीच से ग्रामीण उसे कंधे पर उठाकर अस्पताल की ओर भागे. यह भी पढ़े:  VIDEO: बिहार के नवादा में एंबुलेंस न मिलने पर बेटे को स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ा मां का शव, वीडियो वायरल होने पर अस्पताल ने दी ये सफाई

जव्हार गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

दुर्भाग्य से, अस्पताल पहुंचने में हुई देरी शैलेश के लिए जानलेवा साबित हुई. चिकित्सा केंद्र पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया. डॉक्टरों के अनुसार, यदि उसे समय पर इलाज मिल जाता तो उसकी जान बचाई जा सकती थी.

बारिश में और भी बदतर हो जाते हैं हालात

तिलौंडा और आसपास की आदिवासी बस्तियों के निवासियों के लिए यह समस्या नई नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि मानसून के दौरान यह गांव पूरी तरह से दुनिया से कट जाता है. किसी भी आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस या चार पहिया वाहन का गांव के भीतर आना नामुमकिन है. ऐसे में गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को पहाड़ी रास्तों से ले जाना ही एकमात्र विकल्प बचता है, जिसमें अक्सर जान का जोखिम बना रहता है.

जनप्रतिनिधियों- प्रशासन के खिलाफ गुस्सा

इस दुखद घटना के बाद से गांव वालों में ग्रामसेवक, सरपंच और संबंधित विभागों के खिलाफ गहरा आक्रोश है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से पक्की सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर इस घटना और ग्रामीणों के संघर्ष का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसने सरकार के ‘विकास’ के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.

जव्हार की भौगोलिक स्थिति

जव्हार तालुका अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी दुर्गमता के लिए भी जाना जाता है. हालांकि, इस क्षेत्र की अधिकांश आदिवासी बस्तियां आज भी सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. शैलेश की मौत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं.




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