हक के लिए लड़े छात्रों पर मुकदमा गलत, कॉकरोच दीपके ने उठाई आवाज

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार को छात्रों के आंदोलन को लोकतांत्रिक अधिकार के रूप में देखना चाहिए। जिन युवाओं ने अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाई, उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। CJP प्रवक्ता ने 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, सुनवाई के बाद उन्होंने रत्ना सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और अदालत में हुई कार्यवाही की जानकारी साझा की थी।
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो प्रदर्शन करने वाले युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को समाप्त करने की दिशा में बड़ी राहत मिल सकती है। दास के मुताबिक, 25 जुलाई को देशभर के युवाओं से यह प्रतिबद्धता जताई गई थी कि आंदोलन करने पर उनके खिलाफ एफआईआर नहीं होगी और पहले से दर्ज मामलों को वापस लिया जाएगा।
CJP प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से सूची मांगे जाने के बावजूद सरकार की तरफ से उस दिन इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दी गई। उन्होंने मांग की कि झारखंड में आंदोलन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए और सरकार उनकी समस्याओं को बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से हल करे। सौरव दास ने कहा कि छात्रों ने लंबा संघर्ष अपनी समस्याओं के समाधान के लिए किया है और आंदोलन के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना सही नहीं होगा।
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