Himachal विधानसभा में गूंजा खतरनाक कचरे का खतरा

Himachal हिमाचल नालागढ़ के इंडस्ट्रियल इलाके में सॉलिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट के पास रहने वाले ग्रामीणों को खतरनाक कचरे से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने का मुद्दा 27 अगस्त को विधानसभा में ज़ोर-शोर से उठा। विधायकों ने मांग की कि प्लांट की लीज़ खत्म होने के बाद इसे बंद कर दिया जाए। नियम 62 के तहत यह मुद्दा उठाते हुए बद्दी के विधायक हरदीप बावा ने बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (BBN) इंडस्ट्रियल इलाके की इंडस्ट्रीज़ से निकलने वाले खतरनाक कचरे के निपटान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस प्लांट में 601 तरह का खतरनाक कचरा प्रोसेस किया जा रहा है और आरोप लगाया कि दूषित पानी और प्रदूषक आस-पास के गांवों में रहने वाले लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं।

बावा ने कहा कि स्थानीय लोग कैंसर और त्वचा रोगों जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि 20 साल की अवधि पूरी होने के बाद ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोज़ल प्लांट की लीज़ को रिन्यू न किया जाए। उन्होंने बताया कि अभी इस प्लांट में 2,662 इंडस्ट्रियल यूनिट्स से निकलने वाले कचरे का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि लीज़ खत्म होने के बाद कंपनी को काम जारी रखने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए।

इन चिंताओं का जवाब देते हुए उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने माना कि खतरनाक प्रदूषकों का निकलना आस-पास रहने वाले ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य का बड़ा खतरा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि ट्रीटमेंट, स्टोरेज और डिस्पोज़ल प्लांट को तुरंत बंद करना या कहीं और शिफ्ट करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार इस मामले को देख रही है। हम एक वैकल्पिक जगह की पहचान करेंगे जहां प्लांट को बाद में शिफ्ट किया जा सके, लेकिन इसे एक लंबी अवधि की योजना के तौर पर करना होगा।” चौहान ने कहा कि सरकार BBN इलाके में इंडस्ट्रियल यूनिट्स से होने वाले प्रदूषण को लेकर भी चिंतित है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के निर्देशों के अनुसार, सरकार ने ऐसी इंडस्ट्रियल यूनिट्स को हतोत्साहित करने का फैसला किया है जिनमें बहुत ज़्यादा बिजली और पानी की खपत होती है, जैसे कि इथेनॉल प्लांट जिनसे तीखी गंध निकलती है।

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी इंडस्ट्रीज़ को हतोत्साहित करना चाहती है जो 50 से 100 मेगावाट बिजली और रोज़ाना 5 से 10 लाख लीटर पानी की खपत करती हैं और साथ ही खतरनाक कचरा भी पैदा करती हैं। मंत्री ने बताया कि इंडस्ट्रियल कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निपटान को सुनिश्चित करने के लिए हाई कोर्ट के निर्देशों पर 2006 में यह ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि इस सुविधा को 20 साल की लीज़ दी गई थी, लेकिन इसकी 20 लाख टन की क्षमता के मुकाबले इसने केवल लगभग चार लाख मीट्रिक टन कचरे का ही निपटान किया।


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