नक्सल आतंक से बंद पड़े स्कूलों में अब गूंजता है “अ” से अनार

बस्तर अंचल के बीजापुर जिले में लंबे समय से बंद पड़े 26 स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के साथ धमाचौकड़ी देखने को मिल रही है। अरसे बाद ये स्कूल फिर से गुलजार हुए हैं। जिला प्रशासन की विशेष पहल से वनांचल में रहने वाले बच्चों के भविष्य को सवारने का काम शुरू हो गया है।

जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि नक्सली भय और आतंक के चलते बीजापुर जिले के इन बंद पड़े स्कूलों में फिर से पढ़ाई-लिखाई का काम शुरू हुआ है। स्कूलों के संचालन के लिए अस्थाई शैड की व्यवस्था की गई है। इन स्कूलों में ग्रामीणों को समझाईश देकर उनके बच्चों को दाखिला दिया जा रहा है।

बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का जिम्मा स्थानीय युवाओं को दिया गया। इन्हें शिक्षा दूत के रूप में मानदेय आधार पर नियुक्त किया गया है। बच्चों के लिए कापी, किताब, स्लेट, पेनसिल आदि की व्यवस्थ की गई है। इन स्कूलों में मध्यान्ह  भोजन की व्यवस्था की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि जिले के बीजापुर और भैरमगढ़ के पांच-पांच, उसूर के छह और भोपालपट्टनम के दस स्कूलों में लंबे अरसे बाद फिर से पढ़ाई -लिखाई शुरू हुई है। इससे ग्रामीणों में शासन प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है। अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए इन स्कूलों में भेज रहे हैं। ग्रामीणों द्वारा कई स्थानों में स्कूल शुरू करने की मांग भी आ रही है।

गौरतलब है कि वर्ष 2005 में सलवा-जुड़ूम अभियान के दौरान आतंक और भय के कारण जिले के कई स्कूल बंद हो गये थे जिसके चलते यह ईलाका पूरी तरह से मुख्य धारा से कट कर शासन प्रशासन की योजनाओ से वंचित हो गया था।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल से इन इलाकों में बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की मुहिम जिला प्रशासन द्वारा चलाई गई जिसके तहत् अतिसंवेदनशील ईलाको में ग्रामीणों का साथ लेकर शालाओं को फिर से शुरू किया गया है।

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