SIR को लेकर ओवैसी का बड़ा आरोप, बोले- हम शुरू से इसे ‘बैकडोर NRC’ कहते आए हैं
ओवैसी ने दावा किया कि भविष्य में सरकार NRC लागू कर सकती है और इसके लिए मतदाता सूची को आधार बनाया जा सकता है। यह ओवैसी का राजनीतिक दावा है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग के अंदर ही इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं है कि काम किस तरह हो रहा है।
उन्होंने चुनाव आयुक्तों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए। साथ ही पूछा कि चुनाव आयोग की ओर से कैबिनेट सचिव को पत्र क्यों लिखा गया। ओवैसी ने इस पूरे मामले में चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। चुनाव आयोग के आधिकारिक मतदाता पोर्टल पर SIR-2026 के तहत मतदाताओं के लिए एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और पिछली SIR मतदाता सूची में अपना नाम खोजने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ओवैसी लंबे समय से SIR की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते रहे हैं। दिसंबर 2025 में लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान भी उन्होंने इसे ‘बैकडोर NRC’ बताते हुए आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग को नागरिकता निर्धारित करने का अधिकार नहीं है।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग स्वयं एक स्वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है, जिसकी जिम्मेदारी देश में चुनाव प्रक्रियाओं के संचालन की है। मतदाता सूची की तैयारी, पुनरीक्षण और सुधार का कानूनी ढांचा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 सहित संबंधित चुनावी कानूनों के तहत संचालित होता है। ओवैसी के ताजा बयान के बाद SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
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