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परवाणू से तारादेवी रोप-वे बनाने को कंपनी तैयार

Shimla. शिमला। परवाणू से तारादेवी के लिए पीपीपी मोड पर रोप-वे बनाया जाना है। निजी कंपनियों की तरफ से कुछ प्रस्ताव रोप-वे कारपोरेशन को मिले हैं। हालांकि अभी टेंडर को एक महीने के लिए आगे खिसका दिया गया है, परंतु अभी तक जो शर्तें कंपनियों ने रखी हैं, उसके अनुसार अडानी ने कहा है कि एक लाख टूरिस्ट एक साल में इस रोप-वे के जरिए शिमला पहुंचेंगे, तो ही यह फलीभूत हो सकेगा। इससे ज्यादा टूरिस्ट आएंगे, तो वह सरकार को अतिरिक्त राशि भी देने को तैयार हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि परवाणू से तारादेवी के लिए रोप-वे बन जाता है, तो इतनी संख्या में टूरिस्ट आसानी से इसके जरिए यहां पर आएंगे, क्योंकि बाहर से आने वाले टूरिस्ट रोप-वे का रोमांच उठाना चाहते हैं। अभी तक प्रदेश में जहां रोप-वे लगे हैं, वे सफल ही रहे हैं और वहां टूरिस्ट की संख्या बढ़ी है। जब निजी कंपनी पीपीपी मोड पर इसका निर्माण करती है, तो यकीनन फायदा होगा। इसमें कंपनी के साथ और भी शर्तों को रखा गया है। टूरिस्ट की संख्या के हिसाब से सरकार को
पैसा मिलेगा।
यह राशि टेंडर में शामिल की गई है। अभी तक अडानी ने इसमें रूझान दिखाया है, लेकिन उसके साथ एक- दो और कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। कंपनियों से हुई बातचीत के आधार पर ही टेंडर को एक महीने आगे खिसकाया गया है। अब छह जुलाई को इसका टेंडर ओपन होगा, जिसमें देखना होगा कि कितनी कंपनियों ने हिस्सा लिया है। करोड़ों रुपए के इस प्रोजेक्ट को सरकार सिरे चढ़ाना चाहती है, क्योंकि जब परवाणू से तारादेवी तक रोप-वे में टूरिस्ट आएंगे, तो वहां से आगे शिमला के लिए भी रोप-वे का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। इससे शिमला में वाहनों की कतारें नहीं लगेंगी और पहाड़ों के ऊपर से रोमांचकारी सफर का पूरा मजा टूरिस्ट ले सकेंगे। शिमला में भी वे रोप-वे जरिए ही घूमेंगे। तारादेवी से शिमला के लिए सरकारी क्षेत्र में रोप-वे लग रहा है, जबकि परवाणू से तारादेवी तक पीपीपी मोड पर निजी कंपनी द्वारा रोप-वे लगाने की योजना है। अब देखना होगा कि इसमें कितना रूझान कंपनियां दिखाती हैं, क्योंकि बातचीत के बाद जिन जरूरतों को कंपनियां सुझा रही थीं, उनको टेंडर में शामिल किया गया है। फायनांशियल बिड व टेक्निकल बिड के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी।



