पहले मंत्री पर लगाया हत्या की साजिश का आरोप अब कह दिया पत्रकार आदिवासियों की तरह अंगूठा छाप, विधायक की जुबान फिर फिसली

The first minister was accused of conspiracy to murder, now the journalist has said that the thumb impression like the tribals, the MLA's tongue slipped again.

छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के विधायक बृहस्पति सिंह ने आदिवासियों को लेकर विवादित बयान दे दिया है। दरअसल कुछ पत्रकारों ने उनसे तीखे सवाल पूछे थे इसी बात पर कांग्रेस विधायक भड़क गये और उन्होंने पत्रकारों के लिए ‘अंगूठाछाप आदिवासी’ शब्द का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं उन्होंने एक पत्रकार को कह दिया कि उनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। दरअसल राज्य के रामानुजगंज विधानसभा सीट से विधायक बृहस्पति सिंह के काफिले पर कुछ दिनों पहले हमला हुआ था। इस हमले के बाद कांग्रेस विधायक ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पर आरोप लगाया था कि यह हमला उन्हीं के इशारे पर हुआ है। इतना ही नहीं बृहस्पति सिंह ने कहा था कि टीएस सिंहदेव महाराजा हैं, वो कुछ भी करते हैं और उनकी हत्या भी करवा सकते हैं।

अपने इस बयान के बाद उन्होंने माफी भी मांगी थी। उनके इसी बयान को लेकर पत्रकारों ने जब उनसे सवाल किया तब वो भड़क गए।बृहस्पति सिंह ने कहा कि ‘मैं समझता हूं कि आप पत्रकार हैं, बुद्धिजीवी हैं, लिखे हैं…और हमारे अंगूठेछाप आदिवासी की तरह प्रश्न पूछना उचित नहीं समझता हूं…जो भी हमारे साथ घटना हुई थी…उसके बाद मैं थाने गया और उस वक्त भी आपके पत्रकार साथी वहां मौजूद थे…मैंने रायपुर में भी सारी बातें कहीं हैं जिसमें पत्रकार मौजूद थें…सदन में भी जो बयान मेरी तरफ से दिया गया है उसका कवरेज किया जा चुका है। उसका वीडियो मंगा कर देख लीजिए।’ इसपर पत्रकार ने दोबारा उनसे अपना सवाल किया तो कांग्रेस विधायक ने जवाब दिया कि ‘आप पहले पत्रकार बनिये,,पहले अपने सवाल पूछने का तरीका चुनिये…सभी लोगों ने कवरेज किया और सारी बातें मैने बोल दी हैं…तो अगर किसी ने आपको सीखा कर भेजा है या फिर आप अपनी दिमागी हालत थोड़ा ठीक कर लीजिए…फिर पूछ लीजिए सवाल’विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा उस वक्त यह भी कहा था कि ‘मैंने पहले बयान दिया था कि भूपेश बघेल अच्छा काम कर रहे हैं और 20-25 साल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे…यह बात सिंहदेव और उनके परिवार को पसंद नहीं आया और उन्होंने मेरे ऊपर हमले का आदेश दिया।’ इसपर सरगुजा से विधायक सिंहदेव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कुछ वक्त पहले कहा था कि ‘कभी-कभी लोग भावनाओं में आकर ज्यादा बोल जाते हैं…जबकि समस्याओं को आमने सामने की बातचीत में सुलझाया जा सकता है। क्षेत्र और राज्य के लोग उनके बारे में अच्छी तरह से जानते हैं, क्योंकि उनकी छवि सार्वजनिक है…ऐसे में वे इस मुद्दे पर और कुछ नहीं कहना चाहते।’ हालांकि, बाद में इस मामले में हंगामा बढ़ने पर बृहस्पति सिंह ने सदन में माफी मांगते हुए कहा था कि ‘अंबिकापुर में 24 जुलाई की शाम अपने काफिले पर हमले के संबंध में उन्होंने भावावेश में आकर मीडिया या अन्य माध्यमों में आरोप लगाया था।’

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