बाढ़ के बाद नेपाल में मौत का मंजर पुलिस वाहनों में ले जाए जा रहे शव

काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी तबाही के निशान लगातार सामने आ रहे हैं। कहीं मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश जारी है तो कहीं नदियों में बहकर आए शव बरामद किए जा रहे हैं। इस बीच बाढ़ प्रभावित इलाकों से सामने आए वीडियो ने आपदा की भयावहता को फिर उजागर कर दिया है। वीडियो में पुलिस और बचावकर्मी बरामद शवों को वाहनों में रखकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। कई शवों की पहचान तक नहीं हो सकी है।

नेपाल में बुधवार 2 सितंबर तक मृतकों की संख्या बढ़कर **1,127** पहुंच गई है। नेपाल पुलिस के अनुसार अलग-अलग जिलों और भारत में बहकर पहुंचे शवों को मिलाकर यह आंकड़ा सामने आया है। वहीं **4,858 लोगों की तलाश** जारी है। अधिकारियों ने हजारों पुलिसकर्मियों को खोज एवं बचाव अभियान, राहत वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में लगाया है।

वैन में शव ले जाती दिखी पुलिस

नेपाल से सामने आ रहे दृश्य इस आपदा की भयावहता बयान कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों से बरामद शवों को पुलिस और बचाव दल वाहनों के जरिए अस्पतालों, शवगृहों और निर्धारित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं।

30 अगस्त को चितवन जिले में रिकॉर्ड किए गए दृश्यों में पुलिस और अधिकारी सामूहिक दफन की प्रक्रिया में दिखाई दिए। अधिकारियों को बॉडी बैग वाहनों से निकालकर जंगल क्षेत्र में ले जाते हुए देखा गया। पहचान से जुड़ी जानकारी और नमूनों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी अपनाई गई, ताकि बाद में परिवारों से मिलान किया जा सके।

बाढ़ का पानी लोगों को घटनास्थल से बहुत दूर तक बहाकर ले गया है। 2 सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ शव आपदा क्षेत्र से **100 किलोमीटर से ज्यादा दूर** नदी में मिले हैं। इससे लापता लोगों की खोज और शवों की पहचान दोनों बेहद मुश्किल हो गई हैं।

1,127 लोगों की मौत

नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक शव चितवन सहित कई जिलों से बरामद किए गए हैं। बुधवार सुबह तक चितवन में 348, नवलपरासी ईस्ट में 217, नवलपरासी वेस्ट में 190, नुवाकोट में 155 और दूसरे प्रभावित जिलों में बड़ी संख्या में शव मिले थे। नौ शव भारत में भी बरामद होने की जानकारी दी गई।

पुलिस के मुताबिक 1,113 शवों की पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी थी, लेकिन केवल 95 शव परिजनों को सौंपे जा सके थे। सैकड़ों शवों की पहचान नहीं हो पाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

911 अज्ञात शवों की जानकारी जारी

नेपाल पुलिस ने परिजनों को अपने लापता रिश्तेदारों की पहचान करने में मदद के लिए **911 अज्ञात शवों की जानकारी** अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है। बाढ़ में शव कई किलोमीटर दूर तक बह गए और लंबे समय तक पानी व मलबे में रहने के कारण कई मामलों में चेहरे से पहचान करना मुश्किल हो गया है।

ऐसे मामलों में कपड़ों, गहनों, टैटू, शरीर के निशानों और दूसरी पहचान संबंधी चीजों का सहारा लिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर डीएनए सैंपल भी सुरक्षित किए जा रहे हैं।

स्थिति कितनी कठिन है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चितवन में मंगलवार तक बरामद 272 शवों में केवल 12 की पहचान हो पाई थी। पोखरा में एक शव पर अलग-अलग परिवारों ने अपने लापता परिजन होने का दावा किया, जिसके बाद डीएनए जांच की जरूरत पड़ी।

शवगृहों में जगह की कमी

मृतकों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण नेपाल के अस्पतालों और शवगृहों पर भी भारी दबाव पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में शवों को सुरक्षित रखने की क्षमता सीमित होने के कारण प्रशासन को अज्ञात शवों के अस्थायी सामूहिक दफन की प्रक्रिया अपनानी पड़ी।

दफन करने से पहले डीएनए नमूने, तस्वीरें और पहचान से जुड़ी दूसरी जानकारी सुरक्षित की जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी परिवार के डीएनए से मिलान होने पर शव की पहचान की जा सके और जरूरत पड़ने पर उसे परिवार को सौंपा जा सके।

काठमांडू और अन्य इलाकों में अज्ञात शवों को दफनाए जाने के दृश्य भी सामने आए हैं। सुरक्षाकर्मी सुरक्षा उपकरण पहनकर शवों को निर्धारित स्थानों तक पहुंचाते दिखाई दिए।

हजारों लोग अब भी लापता

नेपाल में बचाव अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के अनुसार **4,858 लोग लापता** बताए गए हैं, जबकि 6,541 लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला गया है। 7,912 पुलिसकर्मियों को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है।

लापता लोगों की संख्या में बदलाव भी हो रहा है क्योंकि कई प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था धीरे-धीरे बहाल हो रही है। दूरदराज के क्षेत्रों से संपर्क स्थापित होने के बाद नए मामलों की जानकारी प्रशासन तक पहुंच रही है।

सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम इलाकों तक पहुंचने की है। बाढ़ और भूस्खलन से कई सड़कें, पुल और दूसरी बुनियादी सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे राहत और खोजी टीमों को कई स्थानों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

भारत तक बहकर पहुंचे शव

नेपाल में बाढ़ की ताकत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कुछ शव सीमा पार भारत तक पहुंच गए। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में गंडक नदी से पांच नेपाली नागरिकों के शव बरामद किए गए थे। इनमें दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल थे।

इन शवों को सोनौली सीमा पर नेपाल पुलिस को सौंपा गया। इसके बाद उन्हें पहचान की प्रक्रिया के लिए बुटवल ले जाया गया।

नेपाल पुलिस के बुधवार के आंकड़ों में भारत से कुल नौ शव बरामद होने की जानकारी दी गई है।

26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़

यह भीषण आपदा 26 अगस्त को शुरू हुई थी। हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान खिसकने के बाद अचानक भारी जलप्रवाह ने भोटेकोशी नदी और उससे जुड़े क्षेत्रों में तबाही मचा दी। पानी और मलबे का तेज बहाव बस्तियों की तरफ बढ़ा और रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों, पुलों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान पहुंचाता चला गया।

आपदा इतनी अचानक आई कि कई लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का समय तक नहीं मिला। इसके बाद से नेपाल की सेना, पुलिस और आपदा राहत एजेंसियां लगातार बचाव अभियान चला रही हैं।

परिजनों के लिए सबसे मुश्किल इंतजार

आपदा के बाद हजारों परिवार अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं। अस्पतालों और प्रशासन की ओर से जारी तस्वीरों तथा पहचान संबंधी विवरणों को देखकर लोग अपनों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

कई शवों की स्थिति ऐसी है कि केवल चेहरे से पहचान संभव नहीं है। ऐसे मामलों में डीएनए जांच ही अंतिम विकल्प बन रही है। अधिकारियों के लिए एक तरफ शवों का सम्मानजनक प्रबंधन करना चुनौती है तो दूसरी तरफ पहचान से जुड़ी हर जानकारी सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

नेपाल में अब भी खोज और राहत अभियान जारी है। मृतकों की संख्या 1,100 के पार पहुंच चुकी है और हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। ऐसे में पुलिस वाहनों में ले जाए जा रहे शवों और सामूहिक दफन के दृश्य इस त्रासदी के उस मानवीय पहलू को सामने ला रहे हैं, जिसे आंकड़ों में समझ पाना मुश्किल है।


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