शर्मनाक; अनाथ बालिका से सरकारी बालिकागृह सामूहिक दुष्कर्म, अधिकारियों ने महीनों तक दबाया मामला
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बालिकागृह में नाबालिग से रेप का एक ऐसा मामला आया है जिसे सुनकर आपका दिल दहल जाएगा, एक नाबालिग बालिका से रेप होता है लेकिन मामला बालिकागृह के लोगों के द्वारा छिपाया जाता है, 6 महीने बाद जब बालिका गर्भवती हो जाती है और उसकी तबीयत बिगड़ने लगती है तब मामले में रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई जाती है, एक आरोपी जो कि बालिकागृह का ही कर्मचारी है उसे गिरफ्तार किया जाता है लेकिन उसका डीएनए गर्भस्थ भ्रूण से मेल नहीं खाता, पता चलता है कि बालिका के साथ और भी कई लोगों ने दुराचार किया है।
घटना इस साल के मई की है, मई के माह में बालिका के साथ दुष्कर्म हुआ था, दुष्कर्म के बाद नाबालिग गर्भवती हो गई थी। इस मामले को महीनों तक दबाकर रखा गया था। संस्था और बाल संरक्षण इकाई ने गर्भधारण का मामला छुपाए रखा। बताया जाता है कि जून 2021 में लड़की से आरोपी ने रेप की वारदात को अंजाम दिया था। 5 महिने बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई । माना कर्मचारी ने ही बच्ची से रेप किया था। बता दें कि इस बालिका गृह में 100 से ज्यादा नाबालिग लड़कियां रहती हैं
भाजपा ने केंद्रीय महिला आयोग को लिखा पत्र
भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अनुराग अग्रवाल ने माना एसओएस गृह में नाबालिग बालिका के साथ सामूहिक अनाचार की घटना पर सरकार की चुप्पी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई न किए जाने कि शिकायत राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग से की है। मामले पर संज्ञान लेते हुए त्वरित कार्रवाई कर उक्त बालिका को न्याय दिलाने व माना एसओएस गृह में रह रहे अन्य बालिकाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
पीड़ित बच्ची के बयान के आधार पर एक आरोपित को गिरफ्तार कर पुलिस ने मामले की फाइल बंद कर दी। पीड़ित बालिका ने बच्चे को जन्म दिया, जिसकी मृत्यु हो जाती है, लेकिन डीएनए जांच से पता चलता है कि बच्चे का डीएनए और आरोपित का डीएनए नहीं मिलता। यह बताता है कि बालिका के साथ एक से अधिक लोगों ने दुष्कर्म किया। इस मामले पर राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री जानकारी नहीं होने की बात करती हैं। पूरे घटनाक्रम से मामले की लीपापोती और संदिग्ध कार्यप्रणाली उजागर होती है।



