अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी पर अयोध्या में सेवा शिविर, दिव्यांगों को मिल रही नई उम्मीद
इस अवसर पर महंत राजकुमार दास ने कहा कि जिन लोगों को पैरों, कानों और आंखों से संबंधित समस्याएं हैं, उनकी सहायता कर उनके जीवन में नई दिशा, उत्साह और आत्मविश्वास लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “माननीय अशोक सिंघल जी का पूरा जीवन सनातन धर्म, हिंदू संस्कृति और वेद के लिए समर्पित था। उनकी जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम के सभी पदाधिकारियों के साथ मैं उन्हें शत-शत नमन करता हूं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के सेवा कार्यक्रमों से प्रेरणा लेकर अन्य लोग भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएंगे। महंत राजकुमार दास ने कबीर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दूसरों की पीड़ा को समझना और उसे दूर करने के लिए कार्य करना ही सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के भीतर भी सेवा की यही भावना थी और उन्होंने जीवनभर समाज के लिए कार्य किया।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने अपने कार्यों के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि व्यक्ति किस प्रकार अपना जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पित कर सकता है। जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर उनके इसी योगदान को याद किया जा रहा है। सेवा शिविर का जिक्र करते हुए महंत राजकुमार दास ने कहा कि पिछले कई वर्षों से इस तरह के शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता का सामना कर रहे लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर सामान्य जीवन जीने में सहयोग देना है।
इस दौरान महंत राजकुमार दास ने राम मंदिर आंदोलन में अशोक सिंघल की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल ने देश-विदेश में सनातन धर्म में आस्था और विश्वास रखने वाले लोगों को जोड़ने और उन्हें एक मंच पर लाने का प्रयास किया। अयोध्या में आज दिखाई दे रहे भव्य राम मंदिर तक पहुंचने की लंबी यात्रा में अशोक सिंघल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। महंत राजकुमार दास ने कहा कि अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित सेवा शिविर उनके सेवा भाव को आगे बढ़ाने का प्रयास है और ऐसे कार्यक्रम समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन सकते हैं।
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