स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया दंत चिकित्सा महाविद्यालय का निरीक्षण

इलाज
की प्रक्रिया, प्रयोगशाला की स्थिति, दवाइयों की उपलब्धता तथा उपकरणों की कार्यक्षमता की समीक्षा की। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि रोगियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और मरीजों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से संवाद करते हुए कहा कि अस्पताल केवल इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम है। उन्होंने स्टाफ को प्रेरित करते हुए कहा कि वे मरीजों के साथ संवेदनशील और सहयोगात्मक व्यवहार रखें।मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि:
अस्पताल परिसर को स्वच्छ और संक्रमणमुक्त बनाए रखा जाए
मरीजों को लाइन में खड़े रहने के बजाय व्यवस्थित पंजीयन की सुविधा मिले
सभी चिकित्सकीय उपकरणों की समय-समय पर मरम्मत और परीक्षण सुनिश्चित किया जाए
दंत चिकित्सा विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की समुचित जानकारी दी जाए
डॉक्टरों और स्टाफ के लिए समयबद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं
निरीक्षण के दौरान दंत चिकित्सा महाविद्यालय के डीन, वरिष्ठ चिकित्सकगण, प्राचार्य, अस्पताल अधीक्षक एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने मंत्री को अस्पताल की वर्तमान स्थिति, संसाधनों की आवश्यकता और मरीजों की संख्या के बारे में विस्तृत जानकारी दी। मंत्री जायसवाल ने यह भी आश्वासन दिया कि शासन स्तर पर दंत चिकित्सा महाविद्यालय के उन्नयन के लिए बजट, संसाधन और तकनीकी सहायता को प्राथमिकता दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ में चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह निरीक्षण एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर पूरी तरह गंभीर है और मरीजों को बेहतर अनुभव देने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास कर रही है। निरीक्षण के अंत में मंत्री ने दंत महाविद्यालय की टीम को बेहतर कार्य के लिए सराहना दी और आने वाले समय में मरीजों को और भी बेहतर सेवाएं देने की उम्मीद जताई।



